उधमपुर। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने सड़क दुर्घटना में पीड़ित पक्ष के हित में 1,70,200 रुपये के मुआवजे के निर्देश जारी किए। याचिकाकर्ता, नरिंदर कुमार ने एक मोटर वाहन दुर्घटना में लगी चोटों के लिए मुआवजे का दावा दायर किया। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत दायर दावा याचिका, सड़क यातायात दुर्घटना में लगी चोटों के लिए मुआवजे की मांग के लिए किया जाता है।
जानकारी के अनुसार 7 जनवरी 2020 को याचिकाकर्ता नरिंदर कुमार एक मिनी बस में सवार था। तेज और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण चालक ने नियंत्रण खो दिया, जिससे दुर्घटना हुई। याचिकाकर्ता को गंभीर चोटें आईं, जिसमें उसके दाहिने पैर में फ्रैक्चर भी शामिल है।
याचिकाकर्ता का शुरू में जिला अस्पताल उधमपुर में इलाज किया गया और बाद में आगे के इलाज के लिए जम्मू रेफर कर दिया गया, जहां उसे चिकित्सा खर्च उठाना पड़ा और विशेष देखभाल की आवश्यकता पड़ी। मात्र 25 वर्षीय याचिकाकर्ता अपने माता-पिता का भरण-पोषण करता है और दुर्घटना के कारण अपने परिवार पर निर्भर हो गया है, जिसके लिए उसे एक परिचारक और विशेष आहार की आवश्यकता है। याचिकाकर्ता ने सभी संबंधित दस्तावेजों सहित दिव्यांगता प्रमाणपत्र की प्रमाणित प्रतियां प्रस्तुत कीं। प्रतिवादी ने कहा कि वाहन का बीमा था और बीमा कंपनी उत्तरदायी है। दुर्घटना खराब सड़क की स्थिति के कारण हुई थी, न कि चालक की गलती के कारण। बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि चालक के पास वैध लाइसेंस नहीं था और वाहन ओवरलोड था, जिससे पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन हुआ। अदालत ने पाया कि दुर्घटना चालक की तेज और लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण हुई, जिसकी पुष्टि याचिकाकर्ता की गवाही और एफआईआर व चालान जैसे दस्तावेजी साक्ष्यों से होती है। यह निर्धारित किया कि याचिकाकर्ता दुर्घटना में लगी चोटों के कारण मुआवजे का हकदार है, जबकि बीमा कंपनी यह साबित करने में विफल रही कि चालक के पास वैध लाइसेंस नहीं था। हालांकि, वाहन ओवरलोड था, जिससे पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन हुआ। मुआवजे का मूल्यांकन करते हुए न्यायाधिकरण ने चिकित्सा व्यय, आय की हानि, दर्द और पीड़ा सहित आर्थिक और गैर-आर्थिक नुकसानों पर विचार किया। जिसके तहत आय की हानि 1,12,200, चिकित्सा व्यय 33,000, दर्द और मानसिक पीड़ा 10,000, परिवहन शुल्क 10,000 और विशेष आहार 5,000 मिलाकर कुल 1,70,200 रुपये के मुआवजे की घोषणा की गई। याचिकाकर्ता के पक्ष में 7.5 प्रतिशत ब्याज सहित 1,70,200 रुपये का मुआवजा पारित किया गया और बीमा कंपनी द्वारा इसका भुगतान किया जाएगा।