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Udhampur News: हीमोफीलिया में जटिलताओं को रोककर जी सकते हैं सक्रिय जीवन

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उधमपुर। विश्व हीमोेफीलिया दिवस 17 अप्रैल को मनाया जाता है। हीमोफीलिया एक दुर्लभ ब्लड डिसऑर्डर है जो खून जमने से रोकता है। पीड़ित लोगों को आमतौर पर चोट लगने के बाद सामान्य से ज्यादा समय तक ब्लीडिंग होती है और बहुत ज्यादा ब्लीडिंग और ब्लड क्लॉट का खतरा होता है। उधमपुर जिले में भी कुछ लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं।
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हीमोफीलिया ए और बी अलग-अलग जेनेटिक म्यूटेशन के कारण होते हैं। टाइप ए सबसे आम प्रकार का डिसऑर्डर है, जो एफ 8 जीन में म्यूटेशन के कारण होता है। हालांकि टाइप बी एफ 9 जीन में म्यूटेशन के कारण होता है। हालांकि इसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन इसका उपचार लक्षणों को प्रबंधन और जटिलताओं को रोकने में मदद कर सकता है। सही देखभाल से पीड़ित लोग पूर्ण और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। यह तब होता है जब ब्लड क्लाटिंग के लिए आवश्यक प्रोटीन में से कुछ कम होता है, जिसे फैक्टर VIII या IX के रूप में जाना जाता है। फैक्टर की कमी का लेवल इसकी गंभीरता को निर्धारित करता है।



डॉ. विश्वास महाजन ने बताया कि हल्के हीमोफीलिया से पीड़ित व्यक्ति को केवल सर्जरी या गंभीर चोट के बाद ही ब्लीडिंग हो सकती है, जबकि गंभीर पीड़ित व्यक्ति को बिना किसी वजह या मामूली से चोट के बाद भी ब्लीडिंग हो सकती है। आमतौर पर यह विरासत में मिला होता है, हालांकि कुछ मामलों में यह संक्रमण या कुछ केमिकल के संपर्क में आने से भी हो सकता है।
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कैसे चलता है पता: इसके चार मुख्य प्रकार होते हैं, जो प्रभावित होने वाले विशिष्ट क्लॉट प्रोटीन द्वारा पता चलते हैं।



हीमोफीलिया ए,
जिसे क्लासिकल हीमोफीलिया भी कहा जाता है जो सबसे आम स्थिति है। यह फैक्टर VIII की कमी के कारण होता है, एक प्रोटीन जो ब्लीडिंग को कंट्रोल करने में मदद करता है।



हेमोफिलिया बी
: इसे क्रिसमस रोग भी कहा जाता है, फैक्टर IX की कमी के कारण होता है। यह ए की तुलना में ज्यादा आम नहीं है।



हेमोफिलिया सी
: इसे रोसेन्थल सिंड्रोम भी कहा जाता है, फैक्टर XI की कमी के कारण होता है। यह प्रकार अपेक्षाकृत दुर्लभ है।
एक्वायर्ड हीमोफीलिया
वंशानुगत नहीं है और किसी भी उम्र में हो सकता है। यह एंटीबॉडी के विकास के परिणामस्वरूप होता है जो क्लॉट बनाने वाले प्रोटीन पर हमला करता है और उसे नष्ट कर देता है। एक्वायर्ड हीमोफीलिया बहुत दुर्लभ है, लेकिन अगर तुरंत इलाज न किया जाए तो यह संभावित रूप से जीवन के लिए खतरा हो सकता है।



लक्षण: पीड़ित लोगों को बहुत कम या कोई लक्षण अनुभव नहीं होता है, खासकर अगर वे ब्लीडिंग को रोकने के लिए ट्रीटमेंट कर रहे हैं। हालांकि, कुछ लोगों को निम्नलिखित लक्षण हो सकते हैं।


- जोड़ों का दर्द और सूजन।
- मांसपेशियों से खून आना।
- जोड़ों के आसपास के टिशू में ब्लीडिंग (हेमर्थ्रोसिस)।
- ब्रेन में ब्लीडिंग (इंट्रासेरेब्रल ब्लीडिंग)।



- गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग।
- नाक से खून आना।



- आसानी से चोट लगना।

डाइग्नोस: नार्मल ब्लड टेस्ट से किया जाता है। अगर संदेह हो, तो टेस्ट करवा सकते हैं। ट्रीटमेंट में क्लाटिंग फैक्टर कॉन्संट्रेट का नियमित रूप से इंफ्यूशन होता है। गंभीर मामलों का डाइग्नोसिस शुरुआत में ही हो जाता है, जबकि सामान्य लक्ष्ण वयस्क होने तक नहीं पता चलते हैं। सामान्य तौर पर यह एक आजीवन स्थिति है जिसके लिए सावधानीपूर्वक प्रबंधन की जरूरत होती है। सही उपचार से पीड़ित लोग सामान्य, सक्रिय जीवन जी सकते हैं।



इलाज: इसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन यह उपचार लक्षणों को प्रबंधन करने और जटिलताओं को रोकने में मदद कर सकता है। एक सामान्य उपचार रिप्लेसमेंट थेरेपी है, जिसमें शरीर में क्लॉट जमाने वाले फैक्टर्स को केंद्रित करना शामिल है। जो रक्त केंद्रित करने को ठीक से जमने में मदद कर सकते हैं और गंभीर ब्लीडिंग को रोक सकते हैं। फिजिकल एंड ऑक्यूपेशनल थेरेपी भी हीमोफीलिया से पीड़ित लोगों की गति में सुधार करने और जोड़ों के नुकसान को रोकने में मदद कर सकती है। सही ट्रीटमेंट से लोग पूर्ण और सक्रिय जीवन जी सकते हैं।
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