मछली पालन केंद्र का दौरा करते डीसी।
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रियासी। डिप्टी कमिश्नर निधि मलिक ने शुक्रवार को जिले में मत्स्य पालन क्षेत्र के चल रहे संचालन बुनियादी ढांचे और उपलब्धियों की समीक्षा की। इसके लिए सुला और थनपाल में स्थित मछली फार्मों का व्यापक दौरा किया। दौरे के दौरान डिप्टी कमिश्नर ने प्रजनन चक्र में शामिल विभिन्न चरणों की समीक्षा के अलावा कॉमन कार्क और महाशीर की प्रजनन प्रक्रियाओं का व्यापक मूल्यांकन किया। उन्होंने हैचरी इकाइयों का भी निरीक्षण किया और स्थानीय मछली किसानों को गुणवत्ता वाले बीज उत्पादन और इसके वितरण के लिए अपनाई गई पद्धतियों को समझने के लिए अधिकारियों के साथ बातचीत की। थनपाल फिश फार्म में डीसी ने बायो-प्लांट सेटअप का निरीक्षण किया और प्रजनन तालाबों और अन्य बुनियादी सुविधाओं के रखरखाव की समीक्षा की।
उन्होंने उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण मछली किसानों की आजीविका का समर्थन करने के लिए आधुनिक मछली पालन तकनीकों और टिकाऊ प्रथाओं को अपनाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने मत्स्य विभाग के अतिथि गृह का भी दौरा किया जिसका वर्तमान में नवीनीकरण किया जा रहा है।
अधिकारियों को निर्देश दिया कि नवीनीकरण कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए और कार्यक्षमता व सौंदर्य पर विशेष ध्यान दिया जाए। उपायुक्त ने अधिकारियों को मछली पालन में रुचि रखने वाले स्थानीय युवाओं के लिए बीज की गुणवत्ता में सुधार, फार्म प्रबंधन और क्षमता निर्माण पहलों पर ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया।
उपायुक्त निधि मलिक ने रेशम उत्पादन विभाग की चल रही गतिविधियों की समीक्षा करने और जिले में शहतूत की खेती व कोकून उत्पादन में प्रगति का आकलन करने के लिए ग्रां मोड़ स्थित शहतूत फार्म का दौरा किया। उपायुक्त को बताया गया कि ग्रां मोड़ स्थित शहतूत फार्म 50 कनाल से अधिक भूमि पर फैला है, जिसमें से 30 कनाल भूमि प्री-नर्सरी क्षेत्र के रूप में कार्य करती है। यह भी बताया गया कि कोकून पालन को बढ़ावा देने और रेशम उत्पादन आधारित आजीविका सृजन को बढ़ावा देने के लिए जल्द ही लगभग 15,000 ए-श्रेणी के शहतूत के पौधे उखाड़ कर किसानों में वितरित किए जाएंगे।
इसके अलावा उपायुक्त ने संलग्न शहतूत ब्लॉक का भी निरीक्षण किया। जहां वर्तमान में 8,500 परिपक्व शहतूत के पौधे उग रहे हैं। यह पौधे कटिंग के स्रोत के रूप में काम करते हैं जबकि शेष पौधे किसानों को कोकून उत्पादन के लिए उपलब्ध कराए जाते हैं। इस दौरान मत्स्य पालन विभाग के अतिरिक्त सहायक निदेशक मसूद अनवर और जिला रेशम उत्पादन अधिकारी राजीव गुप्ता भी उपस्थित थे।