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Udhampur News: जातीय जनगणना को लेकर जम्मू-कश्मीर में भी मचा है सियासी घमासान

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जम्मू। जातीय जनगणना को लेकर देश भर में मचे सियासी घमासान के बीच जम्मू-कश्मीर में भी इस मुद्दे पर बहस-मुबाहिसा जारी है। जातीय जनगणना के गुणा-भाग में उलझे कुछ लोग इसे एक सही कदम ठहरा रहे हैं तो कुछ इसके स्वरूप में बदलाव चाहते हैं। वे आरक्षण की परिधि से क्रीमी लेयर को बाहर किए जाने के भी पैरोकार हैं और मानते हैं कि अगर ये कदम राजनीति लाभ के लिए नहीं तो वास्तव में लाभकारी साबित होगा।
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नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारुक अब्दुल्ला ने जातीय जनगणना को लेकर पत्रकारों के सवालों के जवाब में जातीय जनगणना को एकदम वाजिब करार दिया। उनके मुताबिक लोग कहते हैं कि 11 करोड़ मुस्लिम हैं। कुछ इनकी संख्या 12 और 14 करोड़ बताते हैं। कुछ तो 22 करोड़ तक पहुंच जाते हैं। आखिर ये तो हमें जानना ही चाहिए कि वास्तविक संख्या क्या है। इसमें क्या गलत है। हमें जानना चाहिए कि कितने मुस्लिम, सिख और ईसाई हैं।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व डिप्टी सीएम कविंद्र गुप्ता ने भी जातीय जनगणना को एकदम सही ठहराया। एक्स पर अपनी पोस्ट में उन्होंने कहा कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने हमेशा जातीय जनगणना को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया। 2010 में मनमोहन सिंह सरकार ने संसद में आश्वासन दिया। मंत्रिमंडल समूह भी बना, लेकिन नतीजा सिर्फ एक अधूरा सर्वे। जनता को भ्रमित किया, जनगणना को रोका गया।
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जम्मू कश्मीर पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य ने अपने एक्स हैंडल पर जातीय जनगणना को लेकर साफ-साफ लिखा, मैं एक भारतीय हूं और मेरी जाति सनातन है। मैं और कुछ भी लेबल चस्पा किए जाने से इंकार करता हूं। आगे वे कहते हैं सरकार ने जाति को सामान्य जनगणना में शामिल करने का निर्णय लिया है। यदि इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता यह कदम वास्तव में उन लोगों की मदद कर सकता है, जिन्हें सपोर्ट की जरूरत है। हालांकि उन्होंने ये भी जोर देकर कहा कि सरकार को ये सुनिति करना चाहिए कि आरक्षण के लाभों से क्रीमी लेयर को बाहर कर दिया जाए। क्योंकि यदि ऐसा नहीं किया जाता तो ये पात्र उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा।
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