उधमपुर। कृषि और किसान कल्याण विभाग की ओर से जिले के कावा में करीब एक करोड़ की लागत से 35 मीट्रिक टन क्षमता वाली पॉश्चराइज्ड कंपोस्ट बनाने की यूनिट लगाई जा रही है। इससे कंपोस्ट खाद के लिए किसानों की हिमाचल और पंजाब पर निर्भरता कम होगी। उन्हें यहीं पर संक्रमणमुक्त कंपोस्ट खाद मिल सकेगी। उधमपुर, डोडा, रामबन और किश्तवाड़ जिले के किसानों को इसका लाभ मिलेगा।
किसानों को 10 किलोग्राम का कंपोस्ट बैग 150 रुपये में मिलता है। यूनिट शुरू होने पर यह 95 रुपये में उपलब्ध हो पाएगा। प्रदेश में 35 मीट्रिक टन क्षमता वाले दो यूनिट कठुआ और सांबा जिले में हैं। हालांकि दोनों यूनिट से उनके जिले के किसानाें की ही मांग पूरी नही हो पा रही है। इस वजह से उन्हें भी हिमाचल और पंजाब से कंपोस्ट मंगवानी पड़ रही है।
एक बैग में ढाई से तीन किलो निकलता है मशरूम
कंपोस्ट बैग किसानों को मशरूम उत्पादन के लिए खाद के रूप में तैयार करके दिया जाता है। पाॅश्चराइजेशन प्रक्रिया से खाद को संक्रमणमुक्त बनाया जाता है, ताकि मशरूम को कोई नुकसान न पहुंचे। प्रत्येक 10 किलो के बैग से ढाई से तीन किलो मशरूम निकलता है। इसके लिए बीज भी किसानों को विभाग की ओर से उधमपुर कार्यालय में स्थापित किए गए स्पॉन उत्पादन प्रयोगशाला से मुहैया कराए जाते हैं।
पिछले एक वर्ष में किसान व आमदनी दोनों में हुई बढ़ोतरी
वर्ष 2023-24 जिले में 790 किसान मशरूम उत्पादन से जुड़े थे, जिन्हें मशरूम के 90 हजार बैग बाहर से मंगवाकर वितरित किए गए। साल के तीन महीने के सीजन में औसतन प्रतिदिन 25 क्विंटल मशरूम तैयार हुआ। इससे किसानों ने 2 करोड़ 93 लाख 75 हजार रुपये की आमदनी की। अब 1220 किसान मशरूम उत्पादन से जुड़ चुके हैं। पिछले वर्ष के मुकाबले 430 किसानों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है और एक लाख बैग बाहर से मंगवाए गए। इसके चलते औसतन प्रति दिन 28 क्विंटल मशरूम तैयार हुआ है। इससे किसानों को 3 करोड़ 15 लाख रुपये की आमदनी हुई।
एक बार की प्रोसेसिंग में 3500 बैग तैयार होंगे
कावा में तैयार हो रही यूनिट में 3500 बैग एक प्रोसेसिंग में तैयार होंगे। एक प्रोसेसिंग को पूरा होने में 17 दिन का समय लगता है तब जाकर मशरूम उत्पादन के लिए खाद तैयार हो पाती है। यह यूनिट साल में लगभग 12 प्रोसेसिंग कर पाएगी।
कोट
जिले में ही कंपोस्ट बैग तैयार होने से उधमपुर सहित डोडा, रामबन और किश्तवाड़ जिले के किसानों को लाभ मिलेगा। इससे ज्यादा से ज्यादा बेरोजगार लोग मशरूम उत्पादन से जुड़ेगे और आत्मनिर्भर हो पाएंगे।
संजय आनंद, मुख्य कृषि अधिकारी