डोडा। ज़िला डोडा में जंगली जानवरों का बढ़ता आतंक लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। पहले भालू और तेंदुओं के लगातार हमलों से लोग सहमे हुए थे, वहीं अब जंगली सुअरों के झुंडों ने भी कई इलाकों में दस्तक दे दी है। स्थानीय लोगों का दावा है कि कास्तीगढ़ क्षेत्र में 50 से अधिक जंगली सूअर देखे गए हैं, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल है। ग्रामीणों के अनुसार पैदल स्कूल जाने वाले बच्चे और उनके अभिभावक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। खेतों और जंगलों से होकर गुजरने वाले रास्तों पर लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है।
वहीं वन्यजीव विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि लगातार बढ़ रही घटनाओं के बावजूद लोगों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही। बीते छह महीनों में शिवा क्षेत्र में तेंदुए के हमले की करीब 20 घटनाएं सामने आने का दावा किया गया है। वहीं पिछले दस दिनों के भीतर मलवाना पंचायत में भालू के तीन हमलों ने भी लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अभी तीन दिन पहले भी गाऊं देसा में अपनी मक्की की फसल के पास बैठे एक वीडीजी सदस्य साबिर हुसैन भालू के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसका इलाज जीएमसी डोडा में चल रहा है। अब कास्तीगढ़ क्षेत्र में जंगली सूअरों के झुंड किसानों की मक्के की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
जंगली सुअरों की मौजूदगी ज़िला डोडा में पहली बार दर्ज की गई है। कास्तीगढ़ निवासी दर्शन सिंह, पिंकूम बंदराल आदि ने बताया कि पहले तो बंदर और भालू हमारी फसलों को बर्बाद कर रहे
थे, अब बाकी कसर सुअर पूरी कर रहे हैं। लगभग 50 से अधिक पैने दांतों वाले सुअरों का झुंड खतरा बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में जंगली जानवरों की संख्या में अचानक हुई वृद्धि कई सवाल खड़े करती है। लोगों का कहना है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर जंगली जानवर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर क्यों आ रहे हैं और उनकी संख्या में इतनी तेजी से वृद्धि कैसे हुई। ग्रामीणों ने प्रशासन और वन्यजीव विभाग से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की अपील की है।