- समिति ने शिक्षकों को सभी गैर-शिक्षण कार्यों से मुक्त करने की भी मांग की
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। जम्मू-कश्मीर शिक्षक संयुक्त कार्रवाई समिति ने यूटी अध्यक्ष विनोद शर्मा और जिला अध्यक्ष लेख राज परिहार के नेतृत्व में सरकारी स्कूलों में कम और शून्य नामांकन के लिए शिक्षा विभाग की चिंता और शिक्षकों के पदों के विज्ञापन की योजना बनाकर सरकारी स्कूलों में स्टाफ उपलब्ध कराने की सराहना की।
उन्होंने कहा कि इस कदम से निश्चित रूप से नौकरी चाहने वाले उम्मीदवारों को लाभ होगा, लेकिन पदों को डी-फ्रीज करके ऐसा नहीं किया जाना चाहिए। शर्मा ने कहा कि सर्व शिक्षा अभियान यानि मौजूदा समग्र के तहत नियुक्त आरईटी शिक्षक दो दशकों से अधिक समय से ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत हैं और सरकार ने 2018 में इन शिक्षकों के वेतन मुद्दे को हल करने के लिए अतिरिक्त पद सृजित किए थे। अब शिक्षक ग्रेड II और शिक्षक ग्रेड III, के मूल पदों पर समायोजन के मुद्दे को हल किए बिना, सरकार शिक्षकों के 50 प्रतिशत पदों को समाप्त करने की योजना बना रही है, जो बहुत चिंता का विषय है और इससे इन शिक्षकों में परेशानी की भावना पैदा हो गई है।
उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को मौजूदा कर्मचारियों शिक्षक ग्रेड II व III को समायोजित करने के लिए शिक्षकों के पद सृजित करने चाहिए, जो वर्षों से समर्पण और निष्ठा के साथ काम कर रहे हैं क्योंकि इससे मौजूदा शिक्षकों और शिक्षक की नौकरी चाहने वाले उम्मीदवारों, दोनों को लाभ होगा।उन्होंने कहा कि जल्द ही केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर जेकेटीजेएसी के सभी हितधारकों से परामर्श किया जाएगा और यदि सरकार शिक्षकों के मुद्दों का समाधान किए बिना उनके पदों को रद्द करने की दिशा में आगे बढ़ती है, तो इस गंभीर मुद्दे पर जल्द ही रणनीति तैयार की जाएगी। उन्होंने कम नामांकन के नाम पर बिना इसके मूल कारण को जाने शिक्षकों को परेशान किए जाने पर भी अपनी चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि स्कूलों में शिक्षकों को विभाग के साथ-साथ प्रशासन द्वारा प्रतिदिन ऑनलाइन पोर्टल संचालित करने में व्यस्त रखा जाता है। उनके पास गरीब छात्रों तक पहुंचने के लिए कम समय बचता है। उन्हें शिक्षण के अपने प्राथमिक कार्य से वंचित होने के लिए मजबूर होना पड़ता है। शिक्षकों द्वारा अनावश्यक पोर्टल संचालित किए जा रहे हैं जैसे कि जेके समाधान पोर्टल और जेके सेहत पोर्टल पर आम जनता का दैनिक पंजीकरण, स्विफ्ट चैट ऐप का संचालन, मध्याह्न भोजन रिकॉर्ड का दैनिक रखरखाव, यू-डाइज़ पोर्टल, समीक्षा और अन्य पोर्टल का संचालन। इससे छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित होती है। उन्होंने सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए इन गैर-शिक्षण कार्यों को तुरंत रोकने की मांग की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को सभी प्रकार के गैर-शिक्षण कार्यों से मुक्त कर दिया जाना चाहिए तथा उन्हें केवल शिक्षण कार्य के लिए रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से पूरी उम्मीद है कि शिक्षकों, खासकर आरईटी योजना के तहत नियुक्त शिक्षकों का अनावश्यक उत्पीड़न बंद होगा। इस अवसर पर शाम शर्मा, सुकेश खजूरिया, अशोक सेठ, चैन सिंह, रविंदर सिंह राठौर, भूषण खजूरिया, संदीप शर्मा, शमशेर सिंह, बलविंदर सिंह, विजय सदोत्रा आदि मौजूद थे।