शहर में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकलते श्रद्धालु
-हरे रामा हरे कृष्णा का जयघोष करते हुए सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने लिया भाग
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। शहर के इस्काॅन मंदिर से शुक्रवार को धार्मिक श्रद्धा और उल्लास के साथ भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली गई। बैंड बाजे के साथ निकाली गई रथयात्रा में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
दोपहर लगभग दो बजे इस्काॅन मंदिर परिसर से शुरू हुई भव्य रथयात्रा शहर के विभिन्न बाजारों से होकर गुजरी। रथयात्रा में नाचते-गाते और भगवान जगन्नाथ का गुणगान करते तथा रथ को खींच रहे श्रद्धालु प्रभु का जयघोष कर रहे थे। इससे शहर का वातावरण भक्तिमय हो उठा। शहरवासियों की तरफ से यात्रा के स्वागत के लिए जलपान इत्यादि की भी व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था के भी कड़े प्रबंध किए गए थे। समारोह में जिला विकास आयुक्त सलोनी राय, तहसीलदार जय जय सिंह व अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मुख्य रूप से मौजूद रहे।
इस्काॅन मंदिर के सेवादार सुदर्शन व्यास ने बताया कि रथयात्रा से पहले भगवान जगन्नाथ को 56 भोग लगाने की विधि पूरी की गई। इसके बाद विधिविधान के साथ रथयात्रा का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ जगत के स्वामी हैं, वह श्री कृष्ण का ही स्वरूप हैं। मान्यता के मुताबिक इस रथयात्रा का संबंध द्वापर युग में एक कथा से संबंधित है।
उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र से वृंदावन जाते समय कुरुक्षेत्र वासियों ने रथ के घोड़े खोल दिए थे और स्वयं भगवान के रथ को खींचते हुए ले गए थे। भगवान की कृपा से सभी भवसागर से पार हो गए अर्थात उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो गई। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नथ रथयात्रा का संचालन द्वापर युग के समय से होता आ रहा है। ऐसा माना जाता है कि जो कोई भी रथ यात्रा में भाग लेता है अथवा रथ के रस्से को खींचता है तो उसके जन्मों-जन्मों के पाप कट जाते हैं और वे मोक्ष को प्राप्त होता है। उसका दोबारा जन्म नहीं होता।