जिला अस्पताल में भर्ती बच्चे तीमारदारों के साथ।
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उधमपुर। नेशनल क्वालिटी एशयोरेंस स्टैंडर्ड सर्टीफिकेट (एनक्यूएससी) हासिल करने वाले राज्य के एकमात्र जिला अस्पताल में बच्चों के वार्ड में बच्चों को जरूरत अनुसार बेड की सुविधा नहीं मिल पा रही है। वार्ड में हालात यह बने हुए हैं कि एक बेड पर दो से चार बच्चों को उपचार के लिए भर्ती किया गया है। जरूरत अनुसार बेड न मिलने के कारण बीमार बच्चे परेशानियों से जूझ रहे हैं और जिला अस्पताल को मिलने वाले पुरस्कारों पर भी सवाल खड़ा कर रहे हैं।
केंद्र सरकार की कायाकल्प योजना के तहत 2017 में जिला अस्पताल उधमपुर को राज्य का सर्वश्रेष्ठ सरकारी जिला अस्पताल चुना गया था। पुरस्कार के रूप में जिला अस्पताल को केंद्र सरकार की तरफ से 50 लाख रुपये की राशि मिली। 2019 में नेशनल क्वालिटी एशयोरेंस स्टैंडर्ड सर्टीफिकेट हासिल करने वाला राज्य का एकमात्र अस्पताल जिला अस्पताल उधमपुर रहा। पुरस्कार के तौर पर जिला अस्पताल को तीन वर्ष तक विकास के लिए 20 लाख रुपये की राशि केंद्र सरकार से प्राप्त होगा और इससे जिला अस्पताल को 100 प्रतिशत अंक हासिल करने हैं। इसके साथ ही कायाकल्प योजना के तहत 2019 में एक और पुरस्कार जिला अस्पताल मिला है। कई पुरस्कार हासिल करने वाले जिला अस्पताल में आए दिन मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पिछले दिनों अल्ट्रासाउंड करने के लिए डाक्टर न होने के कारण मरीजों ने प्रदर्शन भी किया था। वहीं अब जिला अस्पताल में बच्चों के वार्ड में बीमार बच्चों को बेड की सुविधा न मिलने की परेशानी सामने आई। मौजूदा समय में हालात है कि जिला अस्पताल में बच्चों के बार्ड में एक बेड पर दो, तीन या फिर चार बच्चे रखे गए हैं। इससे जिला अस्पताल में मरीजों को दी जाने वाली बेहतर सुविधाओं के दावे पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सोमवार को बच्चों के दोनों वार्ड बीमार बच्चों से भरे हुए थे और एक बेड पर चार-चार बच्चे भर्ती किए हुए हैं।
हर वर्ष इस समय बीमार बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी होती है और इस तरह की परेशानी सामने आती है। ज्यादातर बच्चों को दस्त हुई है। जिला अस्पताल में बच्चों के बार्ड में 24 बेड की सुविधा है। भविष्य में नया वार्ड बनाने की कोई योजना नहीं है।
डा. विजय बसनोत्रा, मेडिकल सुपरिटेडेंट जिला अस्पताल