मरम्मत के कार्य के चलते बुधवार को राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह से बंद रखा गया। उधमपुर और रामबन में वाहनों की लंबी कतार लगी रही। झुलसा देने वाली गर्मी के कारण वाहनों में यात्री व चालकों की परेशानी दुगनी हो गई। यात्रियों और चालकों को पीने के पानी के लिए दिन भर तरसना पड़ा। चालकों का कहना था कि हर बुधवार को राजमार्ग को बंद रखा जाता है और प्रशासन को गर्मी को ध्यान में रखते हुए पीने के पानी की व्यवस्था करनी चाहिए।
करीब नौ महीने से राजमार्ग को मरम्मत के कार्य के चलते सप्ताह में एक दिन बंद रखा जा रहा है। पहले शुक्रवार को बंद रखा जाता था और अब करीब चार महीने से हर बुधवार को बंद रखा जा रहा है। इस दौरान उधमपुर में घाटी जाने वाले सैंकड़ों वाहनों को रोका जाता है। इसी को लेकर पुलिस ने ट्रकों को मंगलवार रात से उधमपुर में रोकना शुरू कर दिया था।
बुधवार सुबह छह बजे के बाद छोटे वाहनों के भी घाटी की तरफ जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इसके बाद उधमपुर में रोके गए वाहनों की कतार बढ़ती चली गई। जखैनी के साथ भारत नगर, रठियान, गरनई, बट्टलबालियां, मांड व अन्य कई इलाकों में सैकड़ों की संख्या में ट्रकों को रोका गया। राजमार्ग के बंद होने की सूचना होने पर यात्री वाहन कम चल रहे हैं, इसलिए उधमपुर में यात्री वाहन कम रोके गए थे।
जखैनी में पुलिस हर वाहन को रोक कर चालक से पूछताछ कर रही थी। पटनीटाप, किश्तवाड़, भद्रवाह, डोडा, किश्तवाड़, चिनैनी व अन्य रूट पर जाने वाले वाहन पहुंचे तो पुलिस ने चालक से पूछताछ व कागजात की जांच करने के बाद आगे जाने की अनुमति दे दी। बुधवार को गर्मी बहुत ज्यादा थी। दोपहर को धूप तेज होने के बाद तो धूप में कुछ मिनट खड़ा होना भी मुश्किल हो रहा था।
चालकों को पीने के लिए पानी के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। चालकों का कहना था कि उनको ऐसे स्थानों पर रोका जाता है, जहां पर पीने का पानी नहीं होता है। गर्मी को ध्यान में रखते हुए कम से कम पीने के पानी की तो व्यवस्था करनी चाहिए।