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Udhampur News: मिट्टी, चाक और कच्चे चावल खाने की लत बिगाड़ सकती सेहत

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उधमपुर। आधुनिक जीवनशैली और खान-पान में बदलाव के बीच बच्चों और गर्भवती महिलाओं में मिट्टी, चाक और कच्चे चावल खाने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। शहर और आसपास के क्षेत्रों में यह समस्या गंभीर स्वास्थ्य चुनौती के रूप में उभरी है। इसे अक्सर लोग एक सामान्य आदत मानकर टाल देते हैं लेकिन यह गंभीर बीमारियों और पोषक तत्वों की कमी का बड़ा संकेत है।
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गैर खाद्य पदार्थों को खाने की इस लत को पिका विकार कहा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जब शरीर में आयरन, कैल्शियम और जिंक जैसे पोषक तत्वों की कमी हो जाती है तो मस्तिष्क असामान्य चीजों की ओर आकर्षित होने लगता है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहर में भी कुपोषण के कारण यह समस्या आम होती जा रही है।

छोटे बच्चों के लिए मिट्टी खाना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। मिट्टी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया, परजीवी और कीड़ों के अंडे बच्चों के पेट और आंखों में संक्रमण का कारण बन सकते हैं। हुकवर्म और राउंडवर्म जैसे कीड़े शरीर के भीतर पहुंचकर रक्त को सोख लेते हैं जिससे बच्चा शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर होने लगता है।
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गर्भावस्था के दौरान यह स्थिति और भी नाजुक हो जाती है। इससे गर्भस्थ शिशु को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता है। समय से पूर्व प्रसव खतरा बढ़ जाता है।



लक्षण - अत्यधिक थकान, बाल झड़ना, एकाग्रता में कमी, हाथ-पैर ठंडे रहना, हड्डियों में दर्द, नाखूनों और हथेलियों का सफेद पड़ना (खून की कमी) और नींद में बार-बार खलल पड़ना।


आयरन और कैल्शियम से भरपूर संतुलित भोजन लें

चिकित्सक डॉ. दीपक कुमार का कहना है कि मिट्टी या चाक खाने की आदत मानसिक रोग नहीं बल्कि एक शारीरिक चेतावनी है। लोग आयरन और कैल्शियम से भरपूर संतुलित भोजन लें। यदि ऐसी इच्छा बार-बार हो रही है तो तुरंत रक्त जांच करवाएं। समय रहते इलाज और सही सप्लीमेंटेशन से इस आदत को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।
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