उधमपुर। जीएमसी होने के बावजूद आज यह अस्पताल कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।
हालांकि जिले का मुख्य अस्पताल होने के चलते करीब पांच लाख आबादी इस अस्पताल पर निर्भर है लेकिन अस्पताल में मौजूदा समय में कई प्रकार के टेस्टों की सुविधा उपलब्ध न होने के चलते मरीजों को प्राइवेट लैब की ओर रुख करना पड़ता है।
जीएमसी में रोजाना करीब 150 से 200 गर्भवती महिलाएं ओपीडी में अपना चेकअप करवाने के लिए आती हैं।
इनमें से पहली बार अपने स्वास्थ्य की जांच करवाने के लिए आने वाली महिलाओं की संख्या 50 से 60 के करीब होती है। हालांकि अस्पताल में ओपीडी में भी प्रतिदिन 600 के करीब मरीज जांच करवाने के लिए पहुंचते हैं।
इनमें से डाॅक्टरों की ओर से कई मरीजों सहित गर्भवती महिलाओं को भी थायराइड, आर्यन, विटामिन डी, पैक सेल, प्लेटलेट्स के टेस्ट करवाने के लिए कहा जाता है।
लेकिन अस्पताल में टेस्ट की सुविधा न होने के कारण मरीजों को प्राइवेट क्लीनिक में जाकर महंगे दामों में ये टेस्ट करवाने पड़ते हैं।
गौरतलब है कि अगर अस्पताल में थायराइड टेस्ट की सुविधा हो तो यह 50 रुपये में हो जाता लेकिन प्राइवेट क्लीनिक में इस टेस्ट के दाम 200 से शुरू होकर 600 तक होते हैं क्योंकि इस टेस्ट में भी कई तरह के और टेस्ट शामिल होते हैं।
हर गर्भवती महिला को अलग-अलग तरह के टेस्ट लिखे जाते हैं। डाक्टरों की ओर से खासतौर पर इमरजेंसी में जिनका ऑपरेशन करना होता है उन गर्भवती महिलाओं को थायराइड का टेस्ट जरूर लिखा जाता है।
इस संदर्भ में महिला विशेषज्ञ डॉ. दिनेश ने बताया कि गर्भवती महिलाओं के लिए थायराइड का टेस्ट उसी समय करवाया जाता है, जब वह पहली बार डाॅक्टर के पास अपने स्वास्थ्य की जांच करवाने के लिए आती हैं।
अगर किसी महिला का टेस्ट पॉजिटिव आए तो उसके अन्य के टेस्ट करवाने के साथ ही दवाई शुरू कर दी जाती है।
उन्होंने कहा कि यह टेस्ट गर्भवती महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इस टेस्ट से यह पता चलता है कि महिला में हार्मोन्स की कमी तो नहीं है। अगर गर्भवती महिला में हार्मोन्स की कमी पाई जाती है तो फिर बच्चे के ब्रेन बनने में परेशानी आती है।
इस संदर्भ में जीएमसी के प्रिंसिपल डॉ. मृत्युंजय गुप्ता का कहना था कि जल्द ही अस्पताल में थायराइड मशीन आने वाली है। सप्ताह के भीतर अस्पताल में थायराइड के टेस्ट की सुविधा उपलब्ध करवा दी जाएगी।