उधमपुर। जीएमसी अस्पताल पर पूरे जिले के लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी है लेकिन यहां स्टाफ की कमी के चलते लोगों को परेशान होना पड़ रहा है।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के लिए कई आधुनिक मशीनें तो मंगवाई गई हैं लेकिन उन्हें चलाने के लिए स्टाफ ही नहीं है। वहीं अस्पताल में 2021 को कैंसर टेस्ट की टीशु प्रोसेसर मशीन लाखों रुपये खर्च कर लाई गई थी लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी मशीन डिब्बे से बाहर ही नहीं आई है क्योंकि अस्पताल में लैब तकनीशियन की कमी है। गौरतलब है कि जीएमसी में पहले से ही स्टाफ की कमी से जूझ रहा है।
रसौली व गठिया के अलावा अन्य सर्जरी के लोगों की होती है जांच
अस्पताल में आए दिन रसौली, गठिया और अन्य बीमारियों से ग्रस्त मरीजों की सर्जरी की जाती है। उसी दौरान डॉक्टर कई मरीजों का पीस निकालता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि मरीज कहीं कैंसर से पीड़ित तो नहीं है। इसके बाद निकाले गए पीस का टीशु प्रोसेसर मशीन में हिस्टो पैथालॉजी टेस्ट किया जाता है। इससे यह पता लग जाता है कि मरीज को कैंसर है या कोई अन्य बीमारी। मशीन बंद होने के चलते अस्पताल में किसी भी प्रकार की सर्जरी के दौरान निकाले जाने वाले पीस को जम्मू टेस्ट के लिए भेजा जाता है ताकि मरीज कैंसर जैसी बीमारी से पीड़ित तो नहीं है।
जीएमसी में जांच के लिए स्टाफ की कमी
मौजूदा समय में भी अस्पताल में खून जांच व अन्य टेस्टों के लिए बनी लैब में स्टाफ की कमी है। इसके चलते जहां लैब में आठ लोगों की जरूरत है, वहां पर चार से ही काम चलाया जा रहा है। यही कारण है कि स्टाफ की कमी के चलते टीशु प्रोसेसर मशीन का इस्तेमाल आज तक नहीं हो पाया है। इस कारण लोग जम्मू या फिर प्राइवेट क्लीनिक में जाकर टेस्ट करवाने पर मजबूर हैं।
इस संदर्भ में जीएमसी के प्रिंसिपल डॉ. मृत्युंजय गुप्ता का कहना था कि इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं है क्योंकि उनके समय में टीशु प्रोसेसर मशीन नहीं आई गई है लेकिन इसकी जांच की जाएगी कि अगर मशीन अस्पताल में आई थी तो फिर उसे आज तक चलाया क्यों नहीं गया है। मशीन को जल्द से चलाने का प्रयास किया जाएगा।
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