फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Udhampur News: बिना नोटिस बंद किया 23 साल पुराना लोअर संगूर सरकारी प्राइमरी स्कूल

विज्ञापन
प्राइमरी स्कूल लोअर संगूर बंद होने के बाद जर्जर सड़क से होकर दूसरे स्कूल जाते विद्यार्थी
विज्ञापन
- नन्हें छात्राें के लिए हाईवे पार करने का जोखिम उठाकर दूसरे स्कूलों में जाने की बढ़ी परेशानी
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। शिक्षा विभाग ने 23 सालों से चल रहे सरकारी प्राइमरी स्कूल लोअर संगूर को बिना किसी अधिकारिक नोटिस के इंफ्रास्ट्रक्चर समेट कर बंद कर दिया है। इससे स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए परेशानी बढ़ गई है। दूसरा स्कूल क्षेत्र से करीब एक किलोमीटर दूर है। लेकिन इस तक पहुंचने के लिए बच्चों को बिना अंडर पास वाले जम्मू श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग को पार करना पड़ रहा है। इसके बाद कठिन चढ़ाई वाली जर्जर हो चुकी बाडेयां-संगूर सड़क से होकर गुजरना पडता है। यह हादसों के लिए भी खुला न्यौता है और इस समस्या ने नन्हें बच्चों की स्कूल की डगर को बेहद कठिन बना दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लोअर संगूर में करीब 70 घर हैं और इसके अलावा चरी और भारत नगर के साथ लगते क्षेत्र के बच्चे भी इस स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने आते थे। साल 2001 में इस स्कूल को स्थापित किया गया था और तब से एक किराए के कमरे में ही चल रहा था। विभाग इन दो दशक में न तो स्कूल की खुद की इमारत बना पाया और न ही अन्य मुलभूत सुविधाओं को बढ़ाने पर कोई ध्यान दिया गया। लेकिन इसके बावजूद क्षेत्रवासी मोहल्ले के बीचोबीच घर आंगन में स्कूल होने से काफी खुश थे और बिना किसी परेशानी के बच्चों को शिक्षा दिला रहे थे। वहीं अब अचानक से बिना किसी अधिकारिक नोटिस के इस स्कूल को बंद कर दिया गया है। लोगों का आरोप है कि नया सत्र शुरू होेने से पहले से छात्रों को टीसी थमा दिए गए थे।
विज्ञापन

बच्चों के लिए जान का जोखिम बना रहता है

लोअर संगूर इलाका नेशनल हाईवे के ठीक किनारे पर मौजूद है। मोहल्ले से बाहर निकलने के लिए हाईवे को पार करना पड़ता है। अंडर पास नहीं होने से जहां पहले से ही जान का जोखिम बना रहता है और अब तक कई लोग हादसे में जान भी गंवा चुके हैं। वहीं अब इस स्कूल के बंद होने से नन्हें बच्चों को भी हर दिन हाईवे को पार करने का जोखिम उठाना पड़ रहा है। यह काफी चिंताजनक है।
केवल कृष्ण
-

क्षेत्र की अधिकतर आबादी गरीब, यहां स्कूल होना जरूरी

क्षेत्र की अधिकतर आबादी गरीब है और लोग मेहनत मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण करते हैं। सुबह काम पर जाते हैं और शाम को वापस आते हैं। मोहल्ले का स्कूल बंद होने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। बच्चों को दूसरे स्कूल तक ले जाने और वापस लाने के लिए समय का प्रबंधन करना मुश्किल हो गया है। विभाग से अपील है कि इस स्कूल को बंद न किया जाए।
गिरधारी लाल

प्रशासन को इसका संज्ञान लेना चाहिए

क्षेत्रवासियों की मांग है कि स्कूल को बंद न किया जाए। इसके लिए क्षेत्रवासी प्रदर्शन करके भी अपना विरोध जता चुके हैं और लगातार प्रयास कर रहे हैं कि स्कूल बंद न हो। लेकिन इसके बावजूद उनकी मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यह अपनी तरह का पहला मामला है कि जब जनता की आवाज को अनसुना कर मनमर्जी से किसी शिक्षा संस्थान को बंद किया जा रहा है। प्रशासन को इसका संज्ञान लेना चाहिए।
-सोहन लाल


बच्चों को दूर भेजने से अभिभावक चिंतित

बीते 23 साल से स्कूल बिना किसी परेशानी के चल रहा था। लेकिन अब अचानक से बिना किसी ठोस कारण के इस स्कूल को बंद कर दिया जाना चिंताजनक है। अभिभावक अभी भी इस इंतजार में हैं कि स्कूल को फिर से खोला जाएगा और वह दूर के स्कूल में अपने बच्चों को भेजने की परेशानी से राहत पाएंगे। इसके लिए लगातार आवाज भी उठाई जा रही है लेकिन फिर भी समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है।
विज्ञापन

संजय कुमार
-
कोट::
स्कूल लंबे समय से किराये के एक कमरे में चल रहा था। छात्रों की एनरोलमेंट में भी बीते डेढ़ साल से गिरावट दर्ज की गई। शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों में इस स्कूल के शिक्षकों को तैनात कर राहत दिलाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। क्षेत्रवासियों ने खुद अपने बच्चों को दूसरे स्कूलों में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। जल्द ही स्कूल के बंद होने के संबंध में अधिकारिक नोटिस भी जारी कर दिया जाएगा। अगर स्कूल में बच्चों की एनरोलमेंट होती है तो स्कूल को दोबारा संचालन पर विचार किया जाएगा।
-कल्पना जसरोटिया, डिप्टी सीईओ उधमपुर
रिपोर्ट-विजय कुमार
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें