- जिला अस्पताल में सुविधाओं व संसाधनों की कमी के कारण मरीज हो रहे परेशान
- एक दिन में औसतन केवल 100 मरीजों की ही जांच, रूटीन वालों को मिल रही अगली तारीख
उधमपुर। जिला अस्पताल (जीएमसी) में अल्ट्रासाउंड सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ओपीडी, इमरजेंसी और प्रसूति विभाग का पूरा दारोमदार मात्र दो अल्ट्रासाउंड मशीनों और सीमित स्टाफ पर टिका है, जिस कारण जांच के लिए घंटों प्रतीक्षा करनी पड़ रही है।
संसाधनों की कमी के कारण एक दिन में औसतन केवल 100 मरीजों की ही जांच हो रही है। स्थिति यह है कि रोजाना 50 से 60 मरीज रूटीन जांच के लिए पहुंचते हैं, जिन्हें अक्सर अगली तारीख दी जाती है। हालांकि इमरजेंसी में आने वाले मरीजों का टेस्ट उसी दिन किया जाता है, जिससे कतार में खड़े अन्य मरीजों का इंतजार और बढ़ जाता है। दूर-दराज से आने वाले मरीजों को जांच न होने पर मजबूरन निजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है।
अस्पताल में जांच शुल्क सरकारी दरों पर बेहद कम है (सामान्य व येलो कार्ड- 100 रुपये, हड्डी संबंधी - 160 रुपये) जबकि निजी केंद्रों पर यही जांच 500 से 2500 रुपये तक में हो रही है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह बड़ा आर्थिक बोझ है।
समय और पैसा दोनों बर्बाद
अस्पताल पहुंचे मरीज केवल शर्मा ने बताया कि वह सुबह से बिना खाना खाए अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए आए हैं लेकिन काफी इंतजार करने के बाद भी नंबर नहीं आया। सुनीता ने बताया कि उनका नंबर अभी तक नहीं आया है। कुछ मामलों में आपात मरीजों का टेस्ट पहले कर दिया जाता है, जिससे अन्य मरीजों को और ज्यादा इंतजार करना पड़ता है। अगर अस्पताल में सुबह से ही जांच की व्यवस्था को बढ़ा दिया जाए तो राहत मिल सकती है। स्थानीय राकेश कुमार शर्मा का कहना है कि मशीनों और स्टाफ की कमी के कारण कई लोगों को या तो निजी केंद्रों पर जाकर जांच करवानी पड़ती है या फिर उन्हें घर लौटना पड़ता है जिससे समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है।
मशीनों और स्टाफ की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा
रेडियोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. धीरज शर्मा ने बताया कि अल्ट्रासाउंड मशीनों और स्टाफ की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि जल्द ही समस्या का समाधान होगा और मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।