मचैल यात्रा में साल-दर-साल बढ़ते श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए इस बार निर्धारित तिथि से चार दिन पहले ही यात्रा शुरू करने का फैसला किया गया है।
यानी इस बार यात्रा 1 अगस्त से नहीं, बल्कि 26 जुलाई से ही शुरू हो जाएगी। इस तरह का फैसला मचैल यात्रा शुरू होने के बाद पहली बार लिया गया है।
दरअसल, किश्तवाड़ जिले में स्थित पाडर गांव में माता चंडी मचैल में हर वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने के लिए अगस्त माह में आते हैं। भक्तों का आंकड़ा तीन लाख पार करने लगा।
इसलिए इस यात्रा की देखरेख करने वाली ‘सर्व शक्ति सेवक संस्था’ ने सर्व सहमति से चार दिन पहले ही यात्रा शुरू करने की योजना बनाई।
संस्था के चेयरमैन वकील चुनी लाल ठाकुर ने बताया कि यह फैसला संस्था के सभी सदस्यों और लंगर लगाने वाली कमेटियों के साथ सलाह-मशविरा करने के बाद ही लिया गया है। इसके लिए गौरी-शंकर मंदिर किश्तवाड़ में बाकायदा बैठक बुलाई गई।
उन्होंने यह भी बताया कि जुलाई में ही बच्चों की गर्मी की छुट्टियां खत्म हो जाती हैं। इसलिए पढ़ने-लिखने वाले बच्चे इस यात्रा में शामिल नहीं हो पाते थे। इसलिए यात्रा को चार दिन पहले ही शुरू कर दिया गया, ताकि स्कूल-कालेज के बच्चे भी मचैल यात्रा पर जा सकेंगे।
गौरतलब है कि यह यात्रा कभी मात्र 25 लोगों के साथ मां भगवती के परम भक्त ठाकुर कुलबीर सिंह के नेतृत्व में शुरू हुई थी। आज यह आंकड़ा तीन लाख तक पहुंच गई है। पूरे राज्य से लोग यहां पहुंचते हैं।
खराब सड़क चिंता का विषय
संस्था के चेयरमैन चुनी लाल ने कहा कि प्रयास यह रहेगा कि यात्रियों को पहले दिन से ही हेलीकाप्टर सेवा मुहैया करवाई जाए।
लंगर भी पहले दिन से ही शुरू कर दिया जाएगा। लेकिन सबसे चिंता का विषय है गुलाबगढ़ से बटोत तक राष्ट्रीय मार्ग की दयनीय हालत। जहां-तहां पस्सियां और पत्थर गिरने का सिलसिला जारी है। यात्रा से पहले प्रयास रहेगा कि मार्ग की हालत ठीक करवाया जाए। इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों तथा मंत्रियों से लगातार बात-चीत जारी है।