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Udhampur News: दम तोड़ते जलाशयों को मिली संजीवनी, अमूल्य वन संपदा को देंगे जीवनदान

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उधमपुर में वन विभाग की परियोजना के निर्माण के बाद मांड नाले का बढ़े जलस्तर की मौजूदा तस्वीर।
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- वन विभाग ने मांड के जंगल में सूखे नाले में 9.118 मिलियन लीटर की जल भंडारण क्षमता बढ़ाई
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- आगामी समय में जिले के 45 विरासती जलस्रोतों का भी किया जाएगा जीर्णोद्धार
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सौरभ सागर
उधमपुर। जहां एक तरफ पर्यावरण के भस्मासुर जीव जंगल को लीलने पर आतुर हैं तो वहीं वन विभाग कुदरत की अमूल्य संपदा के संरक्षण को लेकर हर संभव प्रयोगात्मक प्रयास कर रहा है। इसके माध्यम से दम तोड़ते प्राकृतिक जलाशयों को पुन: जीवित कर अमूल्य वन्य संपदा को नया जीवन दिया जा रहा है।
वन विभाग की प्रतिपूरक वनरोपण प्रबंधन योजना जहां वन्य पेड़ पौधों और जीव जंतुओं के लिए वरदान साबित हो रही है तो वहीं किसानों की भी बंजर जमीनों को उपजाऊ बनाने में रामबाण का काम कर रही है। सरकार की ओर से वन संरक्षण के लिए प्रतिपूरक वनरोपण प्रबंधन योजना कैंपा की शुरुआत की गई थी। इसके तहत वन विभाग की ओर से प्रदेश में लुप्त हो रहे प्राकृतिक जलाशयों को फिर से जीवंत करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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कुछ ऐसा ही प्रयास वन विभाग उधमपुर की ओर से मांड इलाके में भी किया गया। जिसमें वन्य और ग्रामीण क्षेत्र से गुजरते सूखे हुए नाले को फिर से प्राकृतिक पानी से भर दिया गया। विभाग के प्रयासों की वजह से भूजल का स्तर बढ़ने से जहां सूखते जंगल फिर से हरे-भरे होने लगे हैं तो वहीं वन्य जीवाें को भी पानी के लिए रिहायशी इलाकों की ओर रुख नहीं करना पड़ रहा। खासकर सूखे जलाशय के कारण बंजर होती किसानों की जमीनें भी पानी की उपलब्धता से फिर से हरी-भरी फसले लहलहाने को तैयार हैं। इससे किसान फिर से खेती के माध्यम से अपना रोजगार और परिवार का पालन पोषण करने में जुट गए हैं।
विभाग की ओर से मांड के नर्सरी और कंपार्टमेंट 18/यू में मृदा एवं नमी संरक्षण के तहत पहले चरण में 26 लाख 33,561 रुपये की लागत से काम किया गया हैै। जिसमें ब्रशवुड चेक डैम, डीआरएसएम और क्रेट, वर्क, कंक्रीट चेक डैम, गाद निकालना सहित बुश क्लीयरेंस आदि निर्माण कार्यों के माध्यम से भूजल निकासी हो पाई और जल स्तर खुद ब खुद बढ़ने लग गया। हालांकि दूसरे चरण में इस परियोजना को दोगुणा विस्तार किया जाएगा जिसको लेकर डीपीआर भी तैयार कर दी गई है और जिले में ऐसे 45 विरासती जल स्रोत (बाओली) का चयन किया गया है जिन्हें से फिर से पूर्ण रूप से उपयोग में लाया जा सकेगा।
निर्माण कार्य से हुए लाभ
- 9.118 मिलियन लीटर की अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता बढ़ी
- भूजल पुनर्भरण में वृद्धि

- पहाड़ी ढलानों पर मिट्टी का कटाव कम हुआ
- कृषि के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ी
- वन्यजीवों के लिए नया आवास उपलब्ध हुआ
एक लाख 89 हजार पौधे लगाए
उधमपुर वन प्रभाग 58,853 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है, जो उधमपुर जिले के कुल क्षेत्रफल का 12.93 प्रतिशत है। वर्ष 2024-25 के दौरान विभिन्न योजनाओं के तहत 451.28 हेक्टेयर क्षेत्र को फिर से हर भरा करने पर काम किया गया और एक लाख 89 हजार पौधे लगाए गए हैं। मानव-पशु संघर्ष से निपटने के लिए वन्यजीव विभाग के सहयोग से संयुक्त नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए। जंगल की आग के दौरान क्षेत्रीय कर्मचारी, वन सुरक्षा बल, जिला अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं और स्थानीय आबादी सामूहिक रूप से प्रारंभिक चरण में आग को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए काम करती है। अवैध कटाई से निपटने के लिए नियमित गश्त, चेक पोस्टों पर कड़ी जांच और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की जाती है।
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कोट...
जंगलों में पानी की कमी के कारण जीव-जंतु रिहायशी इलाकों की ओर रुख करने लग जाते हैं जिससे मानव जीवन पर भी खतरा बढ़ जाता है। जंगलों में सूखे हुए जल स्रोत जैसे नाले और नदियों को संरक्षित व पुनर्जीवित कर वन्य जीवन को स्थायी आवास उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। इससे जल स्रोत के साथ लगते किसानों की जमीनों को भी लाभ मिलता है। इसके लिए जिले में कई अन्य प्रयास भी किए जा रहे हैं।
- नवनीत सिंह, डीएफओ उधमपुर
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