फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Udhampur News: फिल्ट्रेशन प्लांट की मशीनें खराब अंदाजे से पानी शुद्ध कर रहे कर्मी

Fri, 12 Jan 2024 12:04 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
खास खबर
विज्ञापन

-गियर बाक्स सहित अधिकतर यूनिटों में लगे अधिकतर उपकरण खराब

-पानी को फिल्टर करने के लिए हाथों से डाली जा रही फिटकरी एवं ब्लीचिंग पाउडर
संवाद न्यूज एजेंसी

उधमपुर। शहर को स्वच्छ पीने का पानी मुहैया कराने के उद्देश्य से सलमेय में बनाया गया वाटर फिल्ट्रेशन प्लांट बदहाली का हाल बयां कर रहा है। फिल्ट्रेशन प्रकिया से जुड़ी गियर बाक्स एवं अधिकतर मशीनें खराब पड़ी हैं। इसके चलते मात्र अंदाजन फिटकरी का इस्तेमाल कर पानी को फिल्टर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

खासकर बारिश के दिन में ब्लीचिंग पाउडर का इस्तेमाल कर शहर को पानी सप्लाई किया जा रहा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शहर को कितना स्वच्छ पानी सप्लाई हो रहा है। केंद्र सरकार की ओर से स्वच्छ भारत एवं स्वस्थ भारत का नारा देकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। सलमेय फिल्ट्रेशन प्लांट का निर्माण शहरवासियों को स्वच्छ पीने का पानी मुहैया कराने के उद्देश्य से किया गया था। इसके तहत पानी को फिल्टर करने के लिए गियर बाक्स यूनिट, एयर यूनिट, फिटकर यूनिट, ब्लीचिंग यूनिट का निर्माण किया गया। इसके अलावा रेपिड सैंड के इस्तेमाल से पानी को स्वच्छ करने की प्रक्रिया के लिए प्लांट में रेपिड सैंड एवं कलर एग्रीगेट यूनिट का भी निर्माण किया गया। रेपिड सैंड यूनिट के निर्माण से पहले पुराने फिल्ट्रेशन प्लांट से 1 लाख गैलन प्रति घंटा पानी की सप्लाई होती थी। इसे बढ़ाकर रेपिड सैंड यूनिट की मदद से 2 लाख गैलन प्रति घंटा कर दिया गया। शुरुआती दौर में तो सभी यूनिट बेहतर ढंग से काम करते रहे, लेकिन धीरे-धीरे प्लांट के सभी यूनिटों में लगाए गए उपकरण देखरेख के अभाव के कारण पूरी तरह से खराब होते चले गए। इसके चलते अब प्लांट में कोई भी यूनिट तकनीकी रूप से काम नहीं कर रहा है। कर्मी अपने हाथों से अंदाजतन फिटकरी एवं ब्लीचिंग पाउडर का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे प्लांट पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये की मशीनरी कबाड़ के रूप में धूल फांक रही है।
विज्ञापन


मात्र 4 मोटरों के दम पर जिंदा हैं फिल्टर प्लांट : सलमेय फिल्टर प्लांट से शहर की लगभग 2 लाख आबादी के लिए पीने का पानी तवी किनारे मौजूद सलमेय नहर से मोटरों के माध्यम से विभिन्न पंपिंग स्टेशनों तक पहुंचाया जाता है। हालांकि अब हालात ऐसे हैं कि मात्र नहर से पानी खिंचने के लिए लगाई चार मोटरें ही फिल्ट्रेशन प्लांट को जिंदा रखे हुए हैं, जो पानी को नहर से लेकर पंपिंग स्टेशनों तक पहुंचाने का काम कर रही हैं। वहीं रेपिड सैंड एवं कलर एग्रीगेट से पानी को फिल्टर करने के लिए बनाए गए गियर बाक्स यूनिट खराब पड़ा है। खासकर गुजरात या फिर मुंबई से मंगाई जाने वाली विशेष रेपिड सैंड एवं कलर एग्रीगेट (छोटी बजरी) भी काफी समय से उपलब्ध नहीं हो पाई है। इससे शहर में सप्लाई होने वाला पानी बिना फिल्टर के ही सप्लाई किया जा रहा है। जो सेहत के लिए काफी हानिकारक साबित हो सकता है।
विज्ञापन

उधमपुर शहर में रोजाना 52 लाख गैलन पानी की सप्लाई की जरूरत है, लेकिन फिल्ट्रेशन प्लांट से मात्र 30 से 35 लाख गैलन की पीने के पानी सप्लाई हो पा रही है। मगर वो भी अगर बिजली की आपूर्ति प्रभावित न हो। इसके लिए अमृत योजना के तहत प्रस्ताव भेजा गया है। इसके तहत शहर में पीने के पानी की सप्लाई को ओर बेहतर किया जा सकेगा। सभी पुरानी पाइप लाइन एवं उपकरणों को हटाकर नया ढांचा तैयार किया जाएगा। इससे शहर में पीने के पानी की सप्लाई काफी बेहतर हो पाएगी। फिल्ट्रेशन प्लांट की लगभग दो साल पहले हुए टेंडर के दौरान प्लांट में रैपिड सैंड का इस्तेमाल किया गया था। बैक वाश से चैनल की समय-समय पर सफाई की जाती है। ताकि दूषित पानी सप्लाई टैंक में न जा सके। इसका खास ख्याल रखा जाता है। फिटकरी एवं ब्लीचिंग पाउडर का मैन्यूली इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर कोई मशीनरी या उपकरण खराब पाया जाता है तो उसकी मरम्मत कराई जाएगी।

- गिरधारी लाल गुप्ता

एईई पीएचई
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें