उधमपुर। कोरोना संकट के बीच डीसी इंदु कंवल चिब ने प्रेसवार्ता कर जिलावासियों को आश्वस्त किया है। उन्होंने बताया कि जिले में हालात काफी हद तक नियंत्रण में हैं। किसी को भी घबरानें की जरूरत नहीं हैं। उधमपुर में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं हैं। लोग बीमारी को छिपाएं नहीं। कोई भी लक्षण सामने आने पर फौरन स्वास्थ्य विभाग को जानकारी दें।
उन्होंने कहा कि उधमपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कुछ लोगों के मन में भ्रम है कि यहां सुविधाओं की कमी हैं। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हैं। जिला प्रशासन स्थिति को संभालने के लिए तैयार है। प्रशासन के पास 500 ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध हैं। इसमें से 250 से अधिक डेल्टा (बडे़ किस्म) टाइप सहित छोटे ब्रेवो टाइप ऑक्सीजन सिलिंडर भी उचित मात्रा में उपलब्ध हैं। 111 ऑक्सीजन कांस्ट्रेटर भी मौजूद हैं। इसलिए उधमपुर में ऑक्सीजन की आपूर्ति में कोई कमी नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर की शुरूआत में प्रतिदिन 30 से 32 बडे़ सिलिंडर कंज्यूम होते थे। मौजूदा समय में 65 से 70 सिलिंडर की रोजाना खपत हो रही हैं। जबकि भरे सिलिंडर की संख्या कहीं अधिक है। उधमपुर के औद्योगित क्षेत्र में स्थापित ऑक्सीजन प्लांट पूरी तरह से कार्यात्मक है। नारायणा अस्पताल सहित जीएमसी जम्मू और रामबन तक उधमपुर से ऑक्सीजन की सप्लाई की जा रही है। जल्द ही जिला अस्पताल का अपना ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट भी तैयार हो जाएगा। इसलिए लोगों को घरों में ऑक्सीजन सिलिंडर खरीदकर रखने की जरूरत नहीं हैं।
उधमपुर में 616 बैड कैपेसिटी का कोविड केयर सेंटर है। जहां 5 से 10 ऑक्सीजन सिलिंडर और तीन ऑक्सीजन कांस्ट्रेटर रखे हैं। जिला में सात कोविड केयर सेंटर कार्यात्मक हैं। लेकिन इसके बावजूद लोग स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ लेने की बजाए बीमारी को छिपा रहे हैं। इसलिए उनकी अपील है कि बुखार अथवा कोई भी अन्य लक्षण नजर आने पर 24 घंटों के भीतर कोरोना टेस्ट करवाएं ताकि समय रहते इलाज किया जा सके।
बीमारी छिपाने से बढ़ा कोरोना का ग्राफ
डीसी ने कहा कि बीमारी छिपाने से जिले में कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। जिले में अभी तक कुल 91 लोगों की कोरोना संक्रमण से मौत हुई है। इसमें से 31 मौतें गत डेढ़ माह में हुई हैं। इनमें ज्यादातर वो लोग थे जिन्होंने बीमारी को छिपाया था। जिले में अभी तक 65 प्रतिशत वैक्सीनेशन हुई है। रामनगर व चिनैनी में सबसे कम लोग टीका लगवा रहे हैं। आकंड़ों के मुताबिक मरने वालों में 93 प्रतिशत लोग ऐसे थे, जिन्होंने टीका नहीं लगवाया और सात प्रतिशत ने वैक्सीनेशन कोर्स पूरा नहीं किया था। सर्वे टीमें दोबारा से घर-घर जाकर लोगों के स्वास्थ्य की जानकारी एकत्र करेंगी।