चकवा में बादल फटने के बाद मलबा हटाते लोग
- फोटो : अमर उजाला
वीरवार को बादल फटने के कारण कुछ घंटों के लिए मची त्रासदी का खौफ शुक्रवार को भी बरकरार था। चकुआ गांव में तीन स्कूली बच्चों के नाले में बह जाने से चकुआ और थबाला पंचायत में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ था। इन दोनों पंचायत में शायद ही कोई ऐसा घर होगा, जिसमें चूल्हा जला हो।
पूरा गांव इन बच्चों के अंतिम संस्कार के लिए चकुआ नाले में उमड़ा हुआ था। इस दौरान वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। हादसे के शिकार लढवाल मिडिल स्कूल के छात्र राकेश को उसके पिता ने मुखाग्नि दी। तीन बहने दो भाइयों में राकेश तीसरे नंबर पर था। दूसरी तरफ नाले में बहे दो छात्राएं रिश्ते में मौसी-भांजी थी।
उन दोनों का अंतिम संस्कार भी चकुआ नाले में ही हुआ। पहली कक्षा की छात्रा शिफाली को उसके पिता और उसकी मौसी पायल को उसके भाई ने मुखाग्नि दी। इस गमगीन मंजर को देखकर हर किसी का कलेजा चाक हो रहा था। इस मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा विधायक नीलम लंगेह, पूर्व विधायक अशोक कुमार, पूर्व विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया भी मौजूद थे।
चकुआ के सरपंच जगदीश कुमार और थबाल के सरपंच अब्दुल अशकुर वानी ने बताया कि बच्चों की मौत ने दोनों पंचायतों को झकझोर कर रख दिया है। लोगों का काफी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि जिस नाले में बच्चे बहे हैं, वह एक नाली थी। इसमें कभी इतना पानी नहीं आया था। लेकिन एक सड़क का काम जारी होने के कारण सारा पानी इसी नाली में आ गया, जिससे नाली नाला का रूप अख्तियार कर लिया। इसलिए प्रशासन को सड़क का काम कर रही एजेंसी पर भी कार्रवाई करनी चाहिए।