कटड़ा-अर्द्धकुंवारी मार्ग पर बाण गंगा से लिंक मार्ग बनाए जाने पर धर्मनगरी में शुरू हुआ घमासान वीरवार देर शाम तक जारी रहा। प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में सड़कों पर उतरे धर्मनगरी के व्यवसायियों ने श्राइन बोर्ड सहित प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलने के साफ संकेत दे दिए।
वीरवार की दोपहर बाद रहे कटड़ा बंद को अभी आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। शुक्रवार को जिला आयुक्त के साथ होने वाली बैठक के बाद ही अगली रणनीति तैयार करने की व्यापार मंडल ने बात कही है। वीरवार दोपहर को प्रदर्शन कर रहे भवन मार्ग के दुकानदारों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में धर्मनगरी के व्यवसयी भी इस आंदोलन में कूद गए तथा सभी व्यावसायिक केंद्रों को बंद कर दिया गया।
बड़ी संख्या में व्यवसायियों ने एशिया चौक पर घंटों धरना देते हुए मार्ग अवरुद्ध रखा। देर शाम एसडीएम नीलम खजूरिया ने व्यवसायियों को आश्वासन दिया है कि शुक्रवार को जिला आयुक्त की मौजूदगी में गिरफ्तार किए गए नेताओं व स्थानीय व्यवसियों के साथ बैठक कर मामले के समाधान का प्रयास किया जाएगा। एसडीएम के आग्रह पर व्यवसायियों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।
इस दौरान कटड़ा व्यापार मंडल से आशु मगोत्रा, अवतार सुरी, बली राम, वरुण मगोत्रा, वरिंद्र केसर, शशि गुप्ता, अजय बड़ू, मोहन सिंह, रवि नाग, अनिल सरपंच, शाम सरपंच आदि ने स्पष्ट किया कि कटड़ा-अर्द्धकुंवारी नए मार्ग को माल डोहाई और आपातकाल स्थिति में इस्तेमाल करने की बात कही गई थी। इस मार्ग पर यात्रियों की आवाजाही किसी हाल में सहन नहीं की जाएगी। उन्होंने इस मुद्दे पर बड़ा आंदोलन शुरू करने के भी संकेत दिए।
धार्मिक संगठन यात्रा पड़ावों पर चिंतित
कटड़ा-अर्द्धकुंवारी नए मार्ग पर यात्रियों की आवाजाही शुरू होने से प्राचीन मार्ग पर यात्रा के प्रमुख पड़ावों का अस्तित्व समाप्त होने की कई धार्मिक संगठनों को चिंता है। इसी कारण नए मार्ग पर यात्रा शुरू करने का उन्होंने भी विरोध किया है। बाण गंगा, चरण पादुका, अर्द्धकुंवारी जैसे प्रमुख पड़ाव यात्रा का हिस्सा माने जाते हैं। जबकि नए मार्ग के शुरू होने से यात्री इन पड़ावों तक नहीं पहुंच पाएंगे।
बीएचपी के जिला प्रधान करण सिंह भी वीरवार को हुई गिरफ्तारियों में शामिल हैं। वहीं शिव सेना नगर प्रधान आशु समोत्रा भी अपने समर्थकों सहित इस आंदोलन में कूद चुके हैं।
घोड़े-पिट्ठू के लिए दरबदर हुए यात्री
वीरवार को भवन मार्ग की दुकानों के बंद और घोड़े-पिट्ठू वालों की हड़ताल से दर्शन को जाने वाले यात्री परेशान रहे। दोपहर को कटड़ा बंद के बाद यात्रियों की परेशानियां और बढ़ गईं। दिल्ली निवासी अजीतपाल का कहना था कि अगर उन्हें यहां के हालात की जानकारी होती तो वह वह अपनी यात्रा स्थगित कर देते।
मजबूरन उन्हें बिना दर्शन के ही लौटना पड़ रहा है। ऐसे ही बाण गंगा में कई ऐसे यात्रियों को देखा गया जो पिट्ठू अथवा घोड़े के लिए दरबदर होते रहे। समय लेकर पहुंचे कई श्रद्धालुओं ने वीरवार को चढ़ाई नहीं की। वे शुक्रवार का का इंतजार करते रहे।