फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बदहाली : देविका की खूबसूरती पर गाद ने लगाया ग्रहण

विज्ञापन
विज्ञापन
उधमपुर। शहर की पवित्र देविका नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में सरकार और प्रशासन के प्रयास का जमीनी स्तर पर कोई परिणाम नजर नहीं आ रहा है। गाद और गंदगी से भरी देविका लगातार बदहाली की गर्त में समाती जा रही है।
विज्ञापन


केंद्र सरकार की 186 करोड़ की देविका परियोजना भी कुछ असर नहीं दिखा पाई है। हाल ही में साल 2024 में हुए लोकसभा और राज्यसभा चुनाव में भी देविका को प्रमुख मुद्दा बनाया गया और इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष ने खूब सियासत भी की लेकिन चुनाव बीतने के बाद यह भी अन्य मुद्दों की तरह सभी इस पर फिर से मौन हैं। लोगों का कहना है कि देविका नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए सरकार और प्रशासन की तरफ हर रोज नई योजनाएं बनाई जाती हैं। इन पर सियासत भी खूब होती है लेकिन आखिर देविका नदी की बदहाली दूर क्यों नहीं हो रही है। शहर की हाउसिंग काॅलोनी से लेकर ओमाड़ा मोड़ तक इसमें हजारों टन गंदगी जमा हो चुकी है। इसकी सहायक नदी दूध गंगा भी गाद और गंदगी से लदी पड़ी है। देविका नदी में प्रदूषण के सबसे प्रमुख कारणों में इसके किनारों पर अवैध अतिक्रमण का होना, घरों से निकलने वाले कचरे और प्लास्टिक का इसमें जमा होना, शहर के गंदे नालों का इसमें आकर गिरना आदि प्रमुख हैं। बीते साल प्रशासन के सहयोग से नगर परिषद ने एनजीटी मानदंडो के तहत देविका नदी को स्वच्छ बनाने के लिए विशेष प्रयास तो शुरू किए हैं लेकिन यह प्रयास भी कागजी योजनाओं से अब तक बाहर नहीं आ पाए हैं।
पाॅलीथिन की रोकथाम को लेकर लगाया जाला एक बरसात में ही बह गया



देविका घाट में पाॅलीथिन की रोकथाम को लेकर बीते साल बरसात से पहले करीब दो लाख रुपये की लागत से लोहे का जाला लगाया गया लेकिन यह एक बरसात में ही बह गया। प्रशासन की खानापूर्ति की यह कार्रवाई कुछ काम नहीं आई। इसको लेकर दोबारा से पुख्ता प्रबंध के वादे समय के साथ हवा हो गए।
विज्ञापन


सीसीटीवी लगाने के बाद भी प्रदूषण की नहीं हो पाई रोकथाम



देविका नदी में कचरा फेंकने वालों पर निगरानी के लिए बीते साल प्रशासन की तरफ से देविका घाट पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की भी योजना बनाई गई। इसका उद्देश्य देविका नदी या इसके आसपास कोई भी व्यक्ति विशेष या व्यापारिक प्रतिष्ठान द्वारा गंदगी फैलाने पर रोक लगाना था। सीसीटी कैमरे लगाने के बाद भी देविका नदी में कचरा डालने पर रोक नहीं लग पाई है।





उधमपुर को देविका नगरी के नाम से जाना जाता है क्योंकि यह नदी शहर के बीचोंबीच से गुजरती है। इससे लोगों की आस्था भी जुड़ी है। देविका गंगा नदी की बड़ी बहन है। मान्यता है कि इस नदी में हरिद्वार के समान अस्थि विर्सजन का फल मिलता है। देविका के तट पर कई देवी-देवताओं के मंदिर हैं। इस कारण रोजाना बड़ी संख्या में लोग धर्म-कर्म के लिए यहां पहुंचते हैं। ऐसे में देविका की बदहाली निराशाजनक है

-यशपाल शर्मा



देविका परियोजना के नाम पर सिर्फ शहर में सीवरेज सिस्टम तैयार किया गया लेकिन देविका नदी अब भी प्रदूषण मुक्त नहीं हो पाई है, जबकि असल काम देविका को गंदगी से मुक्त बनाना था। देविका की बदहाली पर प्रशासन से लेकर सियासतदानों की चुप्पी चिंताजनक है। इसके लिए नए सिरे से प्रयास करने की जरूरत है क्योंकि यह शहरवासियों की आस्था के साथ जुड़ा मुद्दा है।



-सोमराज अत्री

नमामि गंगे की तरह देविका की संध्या आरती भी शुरू की गई है लेकिन जिस घाट पर यह आरती होती है, वहां इस समय इतनी अधिक गंदगी भरी हुई है कि वहां कुछ समय खड़ा होना भी मुश्किल होता है। प्रशासन को देविका को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए पुख्ता प्रबंध करने चाहिए ताकि लोगों की आस्था को इस तरीके से ठेस न पहुंचे।

-महेश बनाथिया


जब तक देविका को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए जमीनी स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक देविका इसी तरीके से राजनीति का सिर्फ एक मुद्दा मात्र बनी रहेगी, इसलिए प्रशासन और सरकार से अपील है कि इसको प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए राजनीति से ऊपर उठकर काम करे।



-सुरिंदर सुदन

देविका की स्वच्छता को लेकर हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। एनजीटी की ओर से भी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से की गई जांच में काफी हद तक परिणाम बेहतर आए हैं। विशेज्ञयों की मदद से परियोजना पर काम किया जा रहा है। लोगों को जागरूक करने के साथ कई प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन इसमें जनता को भी अपना सहयोग देना होगा।
विज्ञापन




-राजिंदर ढिंगरा सीईओ नगर परिषद
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें