उधमपुर। लाखों रुपये मिलने व टेंडर जारी होने के बाद भी नगर परिषद शहर के कैटल पांड की हालत अब तक नहीं सुधार सका है। इसके कारण शहर में मवेशी लावारिस घूम रहे हैं, जो शहरवासियों के लिए परेशानी का सबब बने हुए है।
शहर में लगभग 40 वर्ष पहले एक कैटल पांड बनाया गया था, जिसकी क्षमता 50 से ज्यादा मवेशियों को रखने की है। कैटल पांड को बनाने का उद्देश्य लावारिस मवेशियों को पकड़ कर रखना और मवेशियों के मालिकों से जुर्माना वसूल करना था। शुरूआत में कुछ वर्ष तक नप ने लावारिस मवेशियों को पकड़ कर जुर्माना वसूल किया। लेकिन, फिर अचानक कार्रवाई बंद कर दी गई।
रख रखाव के अभाव में वर्षों से कैटल पांड की हालत खराब है। इस्तेमाल न किए जाने पर खाली कैटल पांड का इस्तेमाल उधमपुर पुलिस स्टेशन कर रहा है। जब भी पुलिस मवेशी तस्करी पर कार्रवाई कर तस्करों से मवेशियों को छुड़वाती है तो इन मवेशियों को पुलिस कैटल पांड में रख देती है। 2019 में नप को कैटल पांड की हालत सुधारने को लेकर आठ लाख रुपये जारी किए गए। लेकिन, कोरोना संकट के कारण काम शुरू नहीं हो सका। फिर 2021 में इसकी राशि दोगुनी कर 16 लाख रुपये कर दी गई। इसके टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। फिर भी इसकी हालत ज्यों की त्यों है।
-----
ठेकेदारी सिस्टम से किया जाएगा काम
सूत्रों के अनुसार कैटल पांड की हालत सुधारने के बाद नगर परिषद कैटल पांड का टेंडर जारी करेगा। इसमें मवेशियों को पकड़ कर रखने और जुर्माना वसूल करने के लिए ठेकेदारी सिस्टम काम करेगा। इससे नगर परिषद को सिरदर्द लेने की जरूरत नहीं होगी। उसे हर वर्ष टेंडर के जरिये भुगतान राशि मिल जाएगी।
-----
31 मार्च से पहले शहर में कई विकास कार्यों को पूरा करने का लक्ष्य है। अगर ये काम नहीं किए गए तो मंजूर राशि वापस हो जाएगी। कैटल पांड की हालत सुधारने के लिए 14 फाइनेंस के तहत राशि मंजूर की गई है। यह राशि 31 मार्च के बाद वापस नहीं होगी। इसलिए, ठेकेदार पहले बाकी के काम निपटा रहे हैं। 31 मार्च के बाद कैटल पांड का काम शुरू कर दिया जाएगा।
- डॉ. जोगेश्वर गुप्ता, नगर परिषद अध्यक्ष, उधमपुर