उधमपुर। विस्थापन की मार झेल रहे जम्मू प्रांत के विभिन्न जिलाें के विस्थापितों ने मांगों को लेकर जम्मू प्रवासी कल्याण समिति के बैनर तले शहीद भगत सिंह पार्क में प्रदर्शन किया। उनका आरोप था कि 30 साल से समस्याओं को लेकर कोई भी कदम उठाया नहीं गया। इस वजह से उन्हें राशन कार्ड, राहत राशि व अन्य सुविधाओं से महरूम रहना पड़ रहा है।
शेर सिंह ने कहा कि सिर्फ विकास और जनहित के बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन 1995 के विस्थापितों की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। विस्थापित के बाद परिवार कम थे। अब सदस्यों की संख्या तीन गुणा से अधिक हो गई है। इसके बावजूद राशन कार्ड में न ही परिवार के नए सदस्यों के नाम चढ़ाए गए और न ही जिनका निधन हो गया, उनके नाम हटाए गए। इसके अलावा अलग से बस परिवारों के भी नाम नहीं काटे गए। उन्होंने आरोप लगाया कि 30 सदस्यों के एक परिवार को मात्र पांच सदस्यों के लिए 13 हजार रुपये की राहत राशि प्रदान की जा रही है।
जम्मू प्रवासी कल्याण समिति के चेयरमैन कौशल शर्मा ने कहा कि जिला डोडा, रामबन, किश्तवाड़ और भद्रवाह के लोगों ने आतंक की जो मार झेली है, उसके बाद भी सरकार या प्रशासन की ओर से समस्याओं को नजरअंदाज किया रहा है। इससे उन्हें हर क्षेत्र में परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया तो विस्थापितों को मजबूर होकर सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाना पड़ेगा।
कश्मीरी प्रवासियों की तर्ज पर एक राशन कार्ड पर एक नौकरी मिले
परिवारों की मांग है कि पंजीकृत प्रवासियों के राशन कार्ड में बहू और नवजात को शामिल किया जाए। जम्मू प्रवासियों की तर्ज पर दो चरणों में मुफ्त राशन प्राप्त कर चुके 228 परिवारों के मामले को जारी रखना, विचार करना, प्रधानमंत्री पैकेज के तहत कश्मीरी प्रवासियों की तर्ज पर एक राशन कार्ड पर एक नौकरी, प्रवासियों को आवासीय क्वार्टर उपलब्ध कराना, स्थायी पुनर्वास, आतंकवादियों और अन्य व्यक्तियों द्वारा कब्जा की गई पैतृक भूमि की वापसी और दस्तावेजों काे समान रूप से जारी करना, आय प्रमाण पत्र, ईडब्ल्यूएस, मतदाता कार्ड और प्रवासी प्रमाण पत्र की सुविधा देना शामिल है।