उधमपुर। भागदौड़ भरी जिंदगी और आधुनिक जीवनशैली के बीच कोलेस्ट्रॉल गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनकर उभर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार बदलती खाने की आदतें और व्यायाम की कमी के कारण युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक में समस्या तेजी से बढ़ रही है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने इसे साइलेंट खतरा बताया है जो धीरे-धीरे शरीर को भीतर से खोखला कर देता है।
कोलेस्ट्रॉल शरीर में पाया जाने वाला वसायुक्त (फैट) तत्व है जो कोशिकाओं के निर्माण और हार्मोन के संतुलन के लिए आवश्यक है। यह मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। गुड कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल) शरीर के लिए फायदेमंद होता है। बैड कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) धमनियों में ब्लॉकेज पैदा करता है जिससे रक्त का प्रवाह बाधित होता है।
डॉक्टरों के मुताबिक कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का सबसे बड़ा कारण आहार है। ज्यादा तला-भुना, जंक फूड, समोसे, चिप्स और ट्रांस फैट युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन, बार-बार गर्म तेल का इस्तेमाल शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ा देता है। व्यायाम की कमी, मोटापा और घंटों बैठकर काम करना भी मुख्य कारण है। धूमपान भी जोखिम को बढ़ाते हैं।
लक्षण और पहचान
कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के शुरुआती संकेत बहुत सामान्य हैं जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। इनमें थकान महसूस होना, सीने में भारीपन, सांस फूलना और उच्च रक्तचाप (बीपी) जैसी समस्याएं शामिल हैं। कई मामलों में इसका पता केवल ब्लड टेस्ट के जरिए ही चल पाता है।
क्या करें और न करें
हरी सब्जियां, ताजे फल और फाइबर युक्त भोजन लें। घी, मक्खन और अधिक नमक वाले भोजन से बचें।
रोजाना कम से कम 30-45 मिनट व्यायाम या पैदल चलें। लंबे समय तक बैठने की आदत छोड़ें।
समय-समय पर कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाते रहें। बिना डॉक्टरी सलाह के दवा न लें।
वजन को नियंत्रित रखें और धूमपान से दूर रहें। तनाव और जंक फूड से दूरी बनाएं।
कोलेस्ट्रॉल का सामान्य स्तर 160-200 एमजी/डीएल के बीच होना चाहिए। इससे अधिक होने पर यह सीधा दिल पर हमला करता है और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का कारण बन सकता है।
-डॉ. सुदेश रैना, चिकित्सक