उधमपुर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुला ने शुक्रवार को पेश किए गए अपने बजट में महिलाओं के लिए निशुल्क बस सेवा और बीपीएल परिवारों के लिए 200 यूनिट मुफ्त बिजली की घोषणा की है। इसे सराहा गया है।
सरकार ने पर्यटन स्थल पत्नीटॉप और मानसर के उत्थान को अपने बजट में शामिल किया है। इससे आम वर्ग ने कुछ हद तक तो संतोष व्यक्त किया लेकिन उधमपुर में वेयरहाउस और ट्रांसपोर्ट यार्ड की अहम मांग को नजर अंदाज किए जाने पर नाराजगी भी व्यक्त की है।
जिलावासियों को उम्मीद थी कि पिछले चार दशक से जिले में ट्रांसपोर्ट यार्ड और वेयरहाउस की मांग को मौजूदा बजट में प्राथमिकता के साथ शामिल किया जाएगा। खासकर एक दशक बाद सत्ता में आई सरकार और जिले से चुने गए चार विधायकों के चलते आम जनता ने काफी उम्मीदें लगा रखी थीं। बजट में उधमपुर जिले की मुख्य मांगों का जिक्र न होने से ट्रांसपोर्टर्स सहित व्यापारी वर्ग में खासी नाराजगी देखने को मिल रही है।
सरकार की कथनी और करनी में अंतर
उधमपुर की जनता के लिए सरकार के बजट मुंगेरी लाल के हसीन सपनों की तरह हैं क्योंकि सरकारी कथनी और करनी में बहुत फर्क होता है। अगर सरकार 24 घंटे सुचारु ढंग से बिजली और दिन में दो बार पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी ही मुहैया करा दे तो वह भी आम आदमी के लिए बहुत है। मुफ्त में बिजली, महिलाओं के निशुल्क बस यात्रा, स्टांप ड्यूटी में रियायत जैसी घोषणाएं मात्र अपने वोट बैंक लुभाने का प्रयास है।
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जोगिंद्र वर्मा, प्रधान स्वर्णकार संघ
कुछ हद तक महिलाओं के हित से जुड़ा है बजट
उमर अब्दुल्ला सरकार की ओर से पेश किया गया बजट मिलाजुला रहा है। खासकर महिलाओं के हित को ध्यान में रखकर बजट पेश किया गया। हालांकि केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद पहली सरकार का यह पहला बजट है। इसके चलते कुछ न कुछ कमी जरूर रह जाती हैं। हालांकि जनता को इस बजट से काफी उम्मीदें थीं।
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सुरेश खजूरिया, नेता कांग्रेस
बेरोजगार युवाओं के लिए कोई पाॅलिसी नहीं
विस सत्र में जनता के बुनियादी मुद्दों के बजाय बेवजह समय बर्बाद किया जा रहा है। राज्य के दर्जे का मुद्दा केंद्र सरकार के साथ बैठकर ही हल किया जा सकता है। पिछले 10 साल में बेरोजगारी का ग्राफ बढ़ा है लेकिन सरकार के पास कोई पाॅलिसी नहीं है। शिक्षा के क्षेत्र को नजरअंदाज किया गया है। प्राइवेट स्कूल या फिर स्वरोजगार कर रहे युवाओं की मदद के लिए कोई योजना नहीं है। जो बेरोजगार सड़काें पर रेहड़ी फड़ी लगाकर अपना गुजर बसर कर रहे हैं, उन पर लाठियां चलाई जा रही हैं।
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अजय गुप्ता, अध्यक्ष जेके प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन
उधमपुर के कारोबारियों को थी काफी उम्मीदें
जिला उधमपुर पिछले कई दशकों से ट्रांसपोर्ट यार्ड और वेयरहाउस की कमी से जूझ रहा है लेकिन आज तक किसी ने भी इस समस्या को दूर करने की जहमत नहीं उठाई। उधमपुर जिला मुख्यालय पर आसपास के जिले का कारोबार भी निर्भर है। खासकर जिले के दूरदराज इलाकों से भी जिले की सबसे बड़ी आबादी जिला मुख्यालय में व्यापार संबंधी कारोबार के लिए पहुंचती है लेकिन उधमपुर में ट्रांसपोर्ट यार्ड और वेयरहाउस न होने की वजह से उन्हें जम्मू या फिर राज्य के बाहर रुख करना पड़ता है। बजट से लोगों को काफी उम्मीदें थीं लेकिन इस बार भी ऐसी कोई योजना पर चर्चा नहीं की गई।
-दीपक शर्मा, स्थानीय निवासी
फोटो सहित