उधमपुर। जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से पेश किए गए वार्षिक बजट को लेकर हर किसी ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। किसी का मानना है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सरकार की बजट में कोई स्पष्ट नीति नहीं है तो किसी का मानना था कि केंद्रीय योजनाओं के नाम पर वाहवाही लूटने का प्रयास किया गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और सड़क संपर्क में सुधार को लेकर की गई घोषणाओं को लेकर बजट की सराहना भी की गई।
विकास की दृष्टि में विफल है बजट
बजट निराशाजनक है। जनता ने बड़ी उम्मीदें लगा रखी थीं, लेकिन मुख्यमंत्री ने वित्तीय रोडमैप से मायूस किया है। बजट में भविष्य की रणनीति नहीं दिखती। वर्तमान सरकार केवल समय काटने का काम कर रही है और युवाओं, किसानों व व्यापारियों के हित के लिए विशेष प्रावधान नहीं किए गए हैं।
-पवन खजूरिया, वरिष्ठ नेता।
युवा और डेलीवेजरों को फिर निराशा
युवाओं और डेलीवेजरों को निराशा मिली। घोषणापत्र में वादा किया था कि सरकार बनते ही सभी खाली पद 180 दिन में भरेंगे और एक साल में एक लाख नौकरियां दी जाएंगी लेकिन बजट में ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला। डेलीवेजर्स को पक्का करने के लिए कोई निर्णय नहीं लिया गया।
-बलवंत सिंह मनकोटिया, विधायक।
आंकड़ों तक सीमित बजट
सरकार की ओर से ऐसा कोई प्रयास नहीं किया जो गरीब व जरूरतमंद परिवारों के लिए लाभदायक हो सके। सिर्फ आंकड़ों तक ही बजट सीमित रहा।
-सुहानी कटोच, एडवोकेट।
अलग राज्य ही समाधान
विकास और जनता के उद्दार के लिए जम्मू को अलग राज्य का दर्जा देना समय की जरूरत बन चुकी है। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो जम्मू अनदेखी का शिकार होता रहेगा।
- सुभाष चंद्र, समाजसेवक।
जमीनी स्तर पर हों काम
बजट में 200 यूनिट मुफ्त बिजली की घोषणा जमीनी स्तर पर पूरी होनी चाहिए। योजनाओं के पूरे होने से विकास को रफ्तार मिलेगी।
- रीता गुप्ता, रिटायर्ड हेड असिस्टेंट, जेकेबोस।