बिरमा पुल पर पूजा पाठ के साथ वाहनों की आवाजाही की शुरू करवाते बीआरओ अधिकारी।
- फोटो : बिरमा पुल पर पूजा पाठ के साथ वाहनों की आवाजाही की शुरू करवाते बीआरओ अधिकारी।
उधमपुर। पांच साल बाद बनकर तैयार हुए बिरमा पुल को बुधवार को सेना की सीमा सड़क कार्य बल (बीआरटीएफ) 35 के कमांडर एसके सिंह के नेतृत्व में वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया।
जिला मुख्यालय से करीब चार किलोमीटर की दूरी पर पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग पर मौजूद यह पुल शहरवासियों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इसे शहर की लाइफलाइन भी माना जाता है। वर्ष 2020 में बाढ़ के चलते इसके क्षतिग्रस्त होने के बाद से शहर का हर वर्ग विशेषतौर पर कारोबारी वर्ग काफी परेशान था। लोग काफी समय से इसके जल्द से जल्द बनाए जाने की मांग कर रहे थे। इसे देखते हुए बीआरओ ने बिरमा नाले पर 15 करोड़ की लागत से लगभग 115 मीटर लंबे इस नए पुल को तय समय से पहले ही तैयार कर शहरवासियों को बड़ी राहत दी है।
बीआरओ ने इसे असुरक्षित घोषित कर दिया था। शहरवासियों की समस्या को देखते हुए बीआरओ ने अगस्त 2021 में बिरमा नाले पर ही दो बेली पुल तैयार कर वाहनों की आवाजाही शुरू की थी। मौजूदा समय में इन पुलों पर ही वाहनों की आवाजाही चल रही थी लेकिन मार्ग और पुल तंग होने के कारण यहां हर रोज यातायात प्रभावित होता था। इससे शहर का कारोबार भी बुरी तरह से प्रभावित हो रहा था।
गढ़ी-रेहम्बल के कारोबारियों की परेशानी भी हुई दूर, सेना को भी मिली राहत
इस पुल के बनने से जिला मुख्यालय के दूसरे बड़े शहर के रूप में विकसित हो रहे गढ़ी-रेहम्बल के कारोबारियों और यात्रियों को काफी ज्यादा राहत मिली है। इस इलाके में करीब 300 से अधिक दुकानें हैं और जिला मुख्यालय के समीप यह सबसे घनी आबादी वाले इलाके में शामिल हैं। ऐसे में बिरमा पुल से होकर जम्मू के लिए वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने से इस इलाके के लोग काफी परेशान थे। गढी-रैहम्बल और इसके आसपास के दर्जनों इलाकों की सैकड़ों पंचायतों के लोगों को फ्लाटा के रास्ते नए राजमार्ग से होकर सफर करना पड़ता था। इसके अतिरिक्त बिरमा पुल के पार सेना का उतरी कमान मुख्यालय, एम्युनिशन डिपो व कमांड अस्पताल इत्यादि महत्वपूर्ण सैन्य क्षेत्र मौजूद होने से यह पुल सेना के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है। इस पुल के बनने से सैन्य काॅनवाई को पेश आने वाली आवाजाही की परेशानी भी दूर हो गई है।
स्थानीय निवासी पवन देव सिंह,
संजीव सिंह, राहुल कुमार, विक्रम गुप्ता, बलवीर सिंह व अन्य ने कहा कि बिरमा पुल बंद होने से जम्मू के लिए अधिकतर बसें नए राजमार्ग से होकर चलती हैं। इससे लाेगों को फ्लाटा या उधमपुर के जखैनी में पहुंचकर गाड़ी पकड़नी पड़ती थी। लोग काफी समय से इस पुल के बनने का इंतजार कर रहे थे। बीआरओ ने समय से पहले पुल तैयार कर करीब एक लाख आबादी को बड़ी राहत दी है। अब बिना किसी परेशानी के इस पुल से भारी मालवाहक वाहन भी गुजर पाएंगे और गंभीर जाम लगने की समस्या से भी छुटकारा मिल जाएगा। इससे उनका जम्मू के लिए सफर भी कम हुआ है और जिला मुख्यालय तक पहुंचने की राह भी आसान हुई है।