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Udhampur News: नदी को चीरकर श्रद्धालु करते हैं भोले के दर्शन

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चिनैनी में 11 रूद्री ​शिवलींग मंदिर में महा​शिवारात्री पर भक्तों ने बनाया था अस्थाई पुल 
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चिनैनी। इस बार भी महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य पर हजारों भोले के भक्त तवी नदी को चीरकर शिव दर्शनों के लिए भगवान शिव की बरात का साक्षी मंदिर दौशाला पहुंचेंगे।
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दौशाला मंदिर को भगवान शिव की बरात का साक्षी माना जाता है। लगभग सात सौ वर्ष पूर्व निर्मित 11 रुद्री भगवान शिव का मंदिर तवी नदी के किनारे स्थित है। सैकड़ों वर्षों से यह मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है, लेकिन यहां पहुंचने के लिए आज तक न तो पक्की सड़क बन पाई है और न ही पुल। मंदिर कमेटी के सदस्यों ने खासकर महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य पर भक्तों को मंदिर तक पहुंचाने के लिए कई बार अस्थायी तौर पर लकड़ी के पुल बनाया है। इसके जरिए पुल से नदी को पार कर श्रद्धालु भोले के दर्शन के लिए पहुंचते थे। मंदिर तक पहुंचने के लिए कच्ची सड़क का निर्माण किया गया है लेकिन उसकी हालत भी काफी दयनीय है। ऐसी मान्यता है कि इसी प्राचीन मंदिर से होकर भगवान शिव की बरात आगे के लिए रवाना हुई थी। तभी से ही इस मंदिर में हर साल महाशिवरात्रि पर भंडारे का आयोजन होता है। अब यहां मेला भी लगता है, जिसमें दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। मंदिर कमेटी के सदस्य विजय कुमार, राकेश सिंह, अतुल गुप्ता, अमित गुप्ता, विशाल गुप्ता व सोनू की मानें तो यदि सरकार अपना उपेक्षापूर्ण रवैया त्यागकर इस मंदिर को तीर्थस्थल के रूप में विकसित करे तो यहां श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इजाफा होगा। उन्होंने कहा कि प्राचीन मंदिर जहां 11 रुद्री शिवलिंग है और इस मंदिर के दर्शनों के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं। उन्हें समस्या उस समय पेश आती है, जब लोगों को कई किलोमीटर पैदल चलकर मंदिर तक पहुंचना पड़ता है। मंदिर दौशाला तक पहुंचने वाली कच्ची सड़क को पक्का किया जाना चाहिए और उस पर तारकोल बिछाया जाना चाहिए। तवी नदी पर पुल की मांग भी कई बार उठाई जा चुकी है लेकिन अभी भी समस्या हल नहीं हो पाई है। उन्होंने सरकार से इस मंदिर को तीर्थ स्थल के रूप में उभरने की मांग उठाई ।
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धूमधाम से मनाई जाएगी महाशिवरात्रि
चिनैनी। चिनैनी क्षेत्र में महाशिवरात्रि की तैयारियां जोरों से चल रही हैं। चिनैनी के मुक्तेश्वर महादेव मंदिर में साफ सफाई का कार्य पूरा हो चुका है।
दौशाला मंदिर, कुद, बाबा बूढ़ा केदारनाथ, सुद्धमहादेव, मानतलाई, गौरीकुंड व अन्य स्थानों पर महाशिवरात्रि की तैयारियां जारी हैं। सुद्धमहादेव में एक किसान को अपने खेत में हल चलाते समय भगवान शिव की प्राचीन मूर्ति मिली थी। ऐसी मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान शिव ने त्रिशूल से सुद्धांत राक्षस का वध किया था। आज भी वह त्रिशूल भगवान शिव के मंदिर में मौजूद है। मानतलाई में भगवान शिव की बारात गई थी। यहां का पवित्र कुंड भगवान शिव और माता पार्वती की ओर से लिए गए सात फेरों का साक्षी है। यहां मिले मिट्टी के बर्तनों के बारे में कहा जाता है कि ये उसी समय के हैं। इसी तरह बाबा बूढ़ा केदारनाथ में भी कई रहस्य छिपे हैं। वहीं गौरी कुंड में माता पार्वती स्नान के लिए जाती थीं। शिव नगरी में महाशिवरात्रि की तैयारी जोरो से जारी है।
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