कटड़ा। भगवान से मांगने में नहीं बल्कि उसकी रजा में राजी रहने से ही शांति मिल सकती है। यह प्रवचन स्वामी राजेश्वरानंद ने कटड़ा-कश्मीर रोड पर भूमिका मंदिर के पास स्थित श्री राजमाता जी आश्रम में चल रही भागगवत कथा में श्रद्धालुओं को किए।
श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन कृष्ण-सुदामा प्रसंग सुनाते स्वामी राजेश्वरानंद ने कहा कि कृष्ण-सुदामा को अपने कर्मों के अनुसार एक को राजपद तो दूसरे को निर्धनता मिली।सुदामा ने मित्र कृष्ण के पास पहुंचकर भी कुछ मांगा नही लेकिन श्रीकृष्ण ने उसे सब कुछ दे दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रसंग छोटा है लेकिन इसका संदेश बहुत व्यापक है। इससे हमें शिक्षा मिलती है कि हमें जो अपने कर्मों का फल मिला है उसी में जो प्राप्त है वही पर्याप्त है की सोच से परमात्मा का शुक्र मानते हुए आनंदित रहना चाहिए।
सुख साधनों में नही बल्कि साधना में है। परमात्मा की रजा में राजी रहना ही बड़ी साधना है। सुदामा ने कुछ नहीं मांगा तो उसे सब कुछ मिल गया। दूसरी तरफ रावण व हिरण्यकश्यप ने भगवान से बहुत चालाकी से वर मांगे, नतीजतन नाश ही तो हुआ। वृंदावन से पधारे कथाव्यास आचार्य मनोज कृष्ण महाराज ने भजन गाकर फूलों की होली, परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाई।