चिनैनी। बैक टू विलेज का चौथा चरण वीरवार से शुरू हो रहा है, लेकिन गत तीन चरणों में उठाई गई समस्याओं का निपटारा नहीं होने से कई पंचायत प्रतिनिधि नाखुश हैं। उनकी माने तो कई मांगें बैक टू विलेज एक, दो या तीन में उठाई गई थीं, जो अभी तक ठंडे बस्ते में है। ग्रामीणों को इनका कोई फायदा नहीं मिल रहा है। लेकिन चौथे चरण से कुछ आस है।
पंचायत प्रतिनिधियों के अुनसार अभी भी गांवों में पेयजल से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी समस्याएं हैं, जिनका हल अभी तक नहीं हुआ है। तीन चरणों के दौरान चिनैनी ब्लॉक की पंचायतों व गांवों में कई बड़े अधिकारी पहुंचे, लेकिन समस्याएं जस के तस हैं। गांव के विकास के लिए दस-दस लाख रुपये पंचायतों को मिले मगर वह नाकाफी थे। हर चरण के हिसाब से 10-10 लाख रुपये मिलने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। पुरानी मांगों को हल किया जाना चाहिए। चौथे चरण से कई उम्मीदें हैं। सरकार को विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
बैक टू विलेज के तीन चरणों से ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है। समस्याएं जस के तस हैं। दस लाख रुपये पंचायत को विकास के लिए मिले हैं, जिससे समस्याओं का निपटारा संभव नहीं है। पंचायत में पेयजल, शिक्षा, पशु चिकित्सालय, सब सैंटर और पंचायत घर जैसी मांगों को पूरा नहीं किया गया है।
- गायत्री देवी, सरपंच, चलयाड़
पंचायतवासी आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। लोग आज भी पैदल सफर करने के लिए मजबूर हैं। बैक टू विलेज में मिडिल स्कूल को हाई करने व इमारत की मांग भी उठाई गई थी। पंचायत को दस लाख रुपये तो मिले हैं, जिससे डिस्पेंसरी की इमारत बनेगी। जल्द कार्य शुरू होगा।
- छज्जू राम, सरपंच, कोलासर
बैक टू विलेज के तीन चरण हुए मगर दस लाख ही मिले, जिससे विकास संभव नहीं है। पंचायत में सड़क से लेकर शिक्षा पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मिडिल स्कूल को हाई स्कूल का दर्जा मिला, लेकिन अभी तक इमारत नहीं बन पाई है। जुगधार, मोलथी व रयाल में सड़क सुविधा का इंतजार है।
- पवन कुमार, सरपंच, नगुलता
बैक टू विलेज कार्यक्रम तो हुए मगर लोगों की समस्याएं दूर नहीं हुईं। जिस स्तर के अधिकारी गांव में आए थे उस तरह के काम नहीं हुए हैं। पानी की समस्या दूर नहीं हुई। पीएमजीएसवाई का चौथा चरण शुरू करने की मांग थी। अभी भी कई गांवों में बिजली की सुविधा नहीं है। पंचायत को तीस लाख देने के बजाए दस लाख ही दिए गए। उससे पंचायत प्रतिनिधि खुश नहीं हैं।
- प्रकाश चंद, बीडीसी चेयरमैन