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बिना वेतन से अधिक काम करवाने पर भड़कीं आशा वर्कर्स

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उधमपुर। सरकारी कर्मचारियों की तरह वेतन देने की मांग को लेकर आशा वर्कर्स ने शुक्रवार को डीसी कार्यालय के बाहर सरकार और प्रशासन खिलाफ प्रदर्शन किया। आक्रोशित आशा वर्कर्स ने बताया कि 15 वर्ष से प्रशासन व सरकार उनसे काम करवा रही है, लेकिन आजतक न तो वेतन तय किया है और न ही मानदेय दिया जा रहा है। प्रशासन के अधिकारी अब काम करवाने के लिए धमका रहे हैं।
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दोपहर के समय आशा वर्कर्स ने पुष्पा देवी के नेतृत्व में डीसी कार्यालय के बाहर नारेबाजी की। उन्होंने बताया कि 2006 में स्वास्थ्य विभाग ने किसी की मृत्यु व जन्म की रिपोर्ट देने व लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए नियुक्त किया था। इस दौरान एक सेशन के 75 रुपये दिए गए और फिर इसको बढ़ा कर 150 रुपये कर दिया गया। गरीब महिलाएं परिवार का गुजारा चलाने के लिए कम पैसे में काम करने लगीं। वर्ष गुजरने के साथ उनका काम भी बढ़ता चला गया।
अब उनको हर सरकारी योजनाओं में काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। करीब डेढ़ वर्ष से कोविड के लिए काम करवाया जा रहा है। प्रशासन के अधिकारियों के साथ ग्राम सेवक तक उनसे काम करवा रहे हैं, लेकिन वेतन नहीं दिया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों ने काम के लिए धमकाना शुरू कर दिया है। प्रशासन व सरकार की तरफ से सरकारी कर्मचारियों को अतिरिक्त काम करने पर अतिरिक्त वेतन दिया जाता है। कोविड के लिए काम करने पर आंगनबाड़ी वर्कर्स को भी पैसा दिया जा रहा है, लेकिन आशा वर्कर्स को नजरअंदाज किया जा रहा है। जब उनको नियुक्त किया गया था तो सरकार की तरफ से आश्वासन दिया गया था कि कुछ समय के बाद सबको वेतन व मानदेय लगाया जाएगा, लेकिन आजतक कुछ नहीं किया गया है। काम न करने पर ग्राम सेवक ने भी उनको धमकाना शुरू कर दिया है। बार बार धमकी मिलने पर सबने मिलकर डीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया है। प्रशासन को अगर उनसे काम करवाना है तो पहले वेतन व मानदेय तय किया जाए।
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