संवाद न्यूज एजेंसी
रामबन। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी ) की जिला इकाई ने जम्मू-कश्मीर सेवा चयन बोर्ड के हाल ही में नायब तहसीलदार परीक्षा में उर्दू को अनिवार्य विषय के रूप में लागू करने के फैसले की निंदा करते हुए बुधवार को प्रदर्शन किया।
इस विवादास्पद क्लॉज ने उम्मीदवारों और आम जनता के बीच व्यापक असंतोष को जन्म दिया है, जिसके कारण एबीवीपी सड़कों पर उतर आई है। जोशीले नारे और जोशीले भाषणों के साथ हुए इस विरोध प्रदर्शन ने संगठन के क्लॉज के प्रति अडिग विरोध को रेखांकित किया। एबीवीपी के कार्यकर्ता और समर्थक बड़ी संख्या में एकत्र हुए और अपना असंतोष व्यक्त किया और अनिवार्य उर्दू क्लॉज को तत्काल हटाने की मांग की।
आकृति चिब व राहुल रकवाल ने तर्क दिया कि यह खंड भेदभावपूर्ण है और इसे तत्काल सुधारा जाना चाहिए। एबीवीपी ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि सरकार नायब तहसीलदार परीक्षा से अनिवार्य उर्दू खंड को हटाए, जिसमें भाषाई पूर्वाग्रह और विविध पृष्ठभूमि के उम्मीदवारों के लिए असमान अवसरों के बारे में चिंता जताई गई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि इस मांग का पालन न करने पर पूरे राज्य में तीव्र विरोध प्रदर्शन होंगे।
एबीवीपी ने सरकार को कड़ी चेतावनी जारी की है, जिसमें जोर दिया गया है कि विवादास्पद खंड को चुनौती देने का संगठन का संकल्प तभी मजबूत होगा जब मांग पूरी नहीं होगी। संगठन छात्रों, युवाओं और नागरिक समाज को संगठित करने के लिए तैयार है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उम्मीदवारों के अधिकारों की रक्षा की जाए।
विरोध प्रदर्शन का समापन उम्मीदवारों के अधिकारों के लिए लड़ने और यह सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ हुआ कि जेकेएसएसआरबी की नीतियां निष्पक्ष, न्यायसंगत और समावेशी हों। एबीवीपी रामबन इकाई इस मुद्दे के लिए प्रतिबद्ध है और अनिवार्य उर्दू खंड को हटाने की वकालत करना जारी रखेगी
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रामबन में प्रदर्शन करते एबीवीपी के सदस्य।
रामबन में प्रदर्शन करते एबीवीपी के सदस्य।