पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की, प्रसाद भी किया वितरित
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। सोमवती अमावस्या, मलमास के समापन और आषाढ़ संक्रांति(त्रिवेणी संयोग) के पावन अवसर पर देविका तट सहित क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। सुबह से ही श्रद्धालु स्नान, पूजा-अर्चना और दान-पुण्य के लिए पहुंचने लगे थे। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने प्रसाद का वितरण भी किया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या, मलमास समापन और आषाढ़ संक्रांति का विशेष महत्व होता है। इसके चलते रामनगर, चिनैनी, मजालता, कतील गंजू, लड्डन तथा अन्य क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु देविका तट पहुंचे और पवित्र स्नान किया। श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। देविका तट पर कई लोग अपने घर से हलवा, पूड़ी और आलू सहित अन्य प्रसाद लेकर पहुंचे थे जिनका वितरण किया।
विभिन्न धार्मिक संस्थाओं एवं समाजसेवियों की ओर से भंडारों का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं का मानना है कि पीपल के पेड़ की पूजा और 108 बार परिक्रमा करने से ग्रहों के बुरे प्रभावों में कमी आती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
देविका को स्वच्छ बनाए रखने की अपील की
सुदर्शन कुमार शास्त्री ने श्रद्धालुओं से पीपल के वृक्षों की रक्षा करने, युवाओं को नशे से दूर रहने तथा देविका को स्वच्छ बनाए रखने की अपील की। शास्त्री ने बताया, लगभग तीन साल बाद मलमास आते हैं। इस कारण सोमवार सुबह तीन बजे से ही श्रद्धालु देविका तट पर पहुंचना शुरू हो गए थे। बिंदू नाथ अघोरी ने बताया कि वे दो साथियों के साथ हरिद्वार से यात्रा करते हुए देविका तट पहुंचे हैं। यहां दर्शन और पूजा- अर्चना के बाद मचैल, अमरनाथ और फिर सुद्धमहादेव की यात्रा करेंगे।
मैं पूरे मलमास के दौरान देविका में स्नान के लिए आती रही हूं। मलमास के समापन पर विशेष पूजा-अर्चना कर परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना की।
- शारदा देवी, श्रद्धालु
सोमवती अमावस्या और आषाढ़ संक्रांति का विशेष महत्व है। देविका में स्नान और दान-पुण्य से मन को शांति मिलती है।
- सुकन्या, श्रद्धालु
देविका तट पर श्रद्धालुओं की अच्छी खासी भीड़ रही। हमने भी स्नान कर पूजा-अर्चना की और प्रसाद ग्रहण किया।
- सौरभ शर्मा, श्रद्धालु
सोमवती अमावस्या पर जरूरतमंदों को घड़े और अन्य सामग्री दान करने की परंपरा है। यह हमारी संस्कृति और आस्था से जुड़ा पर्व है।
- मोहन लाल, श्रद्धालु