उधमपुर। मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। संदरानी के होनहार ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। झज्जरटाक तक रोजाना 14 किलोमीटर पैदल चले और 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 99.2 प्रतिशत अंक हासिल कर लिए।
पिता की मेहनत को मुख्य आधार बनाते हुए कड़ा संघर्ष किया जिससे होनहार का नाम गांव, स्कूल और जिले के साथ पूरे प्रदेश में रोशन हुआ। सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल टिकरी के छात्र की सफलता ने साबित किया है कि चाहे गांव हो या शहर, निजी हो या सरकारी स्कूल। अगर आपको अपनी और अभिभावकों की मेहनत पर भरोसा है तो सफलता आपके कदम जरूर चूमेगी। रघुचंद्र ने परिवार में सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षकों के मार्गदर्शन से मुकाम हासिल कर लिया।
पिता कौशल कुमार मजदूर हैं जो दिन-रात मेहनत कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। माता ललिता देवी गृहिणी हैं। परिवार में छोटी बहन श्वेता शर्मा है। आर्थिक हालात मजबूत न होने के बावजूद माता-पिता ने रघु की पढ़ाई में पूरा सहयोग दिया। रोजाना करीब 14 किलोमीटर पैदल चले और फिर वाहन से सफर कर स्कूल पहुंचे। इस चुनौती के बावजूद पढ़ाई में कभी ढिलाई नहीं बरती, न ही स्कूल से कभी बंक मारने का सोचा। हमेशा पढ़ाई पर फोकस रखा।
मार्गदर्शन व अनुशासनात्मक शिक्षण प्रणाली ने बढ़ाया हौसला
रघु ने बताया कि 8वीं तक निजी स्कूल से पढ़ाई की। इसके बाद सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल टिकरी में दाखिला लिया। शुरू में पढ़ाई को लेकर डर था लेकिन शिक्षकों ने पूरा सहयोग किया और बढ़िया मार्गदर्शन व अनुशासनात्मक शिक्षण प्रणाली ने हौसलों को उड़ान दी जिससे सफलता हासिल करने में काफी मदद मिली। गतिविधियों में भाग लेने का भी मौका मिला जिससे आत्मविश्वास बढ़ा।
नियमितता और विषय की बेहतर समझ से मिलेगा मुकाम
होनहार का मानना है कि शिक्षा में सफलता के दो मूल मंत्र नियमितता और विषय की बेहतर समझ है। उन्होंने छात्रों को संदेश दिया कि रोजाना स्कूल में पढ़ाई करें और घर जाकर रिवीजन करें जिससे विषयों पर पकड़ मजबूत होगी। स्कूल कोई भी हो, मेहनत पर भरोसा जरूर रखें। यदि कोई छात्र लगातार मेहनत करता है तो उसके लिए कोई भी लक्ष्य कठिन नहीं होता। 11वीं कक्षा में नॉन मेडिकल स्ट्रीम चुनी है और इंजीनियर बनने का सपना है।
रोजाना जो स्कूल में पढ़ाई करता और घर जाकर उसी पाठ को दोबारा पढ़ता था, जिससे विषयों पर उसकी पकड़ मजबूत होती गई। साथ ही उसने अन्य छात्रों को संदेश दिया कि स्कूल कोई भी हो अपनी मेहनत पर भरोसा जरूर रखें। यदि कोई छात्र लगातार मेहनत करता है, तो उसके लिए कोई भी लक्ष्य मुश्किल नहीं होता। फिलहाल अभी 11वीं कक्षा में नान-मेडिकल विषय चुना है और आगे चलकर वह इंजीनियर बनना चाहता है।