एलएसी पर चीन की दादागीरी, भारतीय सैनिकों की शहादत और सीमा पर लगातार बढ़ता सैन्य जमावड़ा। कारगिल युद्ध में हिस्सा ले चुके पूर्व सैनिक और पोर्टर यह सब देख आक्रोश और जोश में हैं। वे कहते हैं कि सरकार एक बार एलएसी पर जाने का मौका दे दे। उम्र दराज होने के बावजूद जिससे जितना हो सकेगा वो करेगा।
कारगिल युद्ध में बर्फीले पहाड़ पर चढ़कर पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ने पर ऑनरेरी कैप्टन ताशी छेपाल को वीर चक्र का सम्मान मिला था। लेह में रह रहे ताशी कहते हैं कि सैनिकों की शहादत से उनके जैसे पूर्व सैनिकों का खून खौल उठा है। वे सरकार को अपनी स्वैच्छिक सेवाएं देने को तैयार हैं। अग्रिम मोर्चे पर गोली चलानी हो, ग्रेनेड फेंकने हों या फिर पोर्टर का काम ही क्यों न करना हो। वे भारतीय फौज के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं।
एक अन्य बुजुर्ग पूर्व सैनिक रिग्जिन ने कहा कि कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने पोर्टर का काम भी किया। तब 20 किलो वजन लेकर पहाड़ के पहाड़ चढ़े हैं। लद्दाखी होने के नाते वह कहना चाहते हैं कि उनमें आज भी वही जुनून और जज्बा है। वह चीन का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।