उत्तरी कमान के जीओसी इन सी लेफ्टिनेंट जनरल संजीव चाचरा ने वर्ष 2014 जम्मू कश्मीर में सेना के लिए चुनौती भरा बताया।
उनके अनुसार अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना के हटते ही तालिबान का प्रभाव जम्मू कश्मीर में हो सकता है। आने वाले चुनावों के लिए सीमा पार बैठे आतंकी घुसपैठ करने की फिराक में हैं और सीमा पर चौकसी बढ़ाई गई है।
सेना दिवस पर भारत-पाक वास्तविक नियंत्रण रेखा से दस किलोमीटर दूर जीओसी ने बताया कि चीनी सैनिकों के भारतीय सीमा में घुसने की कई बार रिपोर्ट आई है।
चीन के साथ सीमा को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, जिसके कारण कभी-कभार भारतीय सैनिक भी चीनी क्षेत्र में चले जाते हैं। स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण चीनी सेना से लगातार फ्लैग मीटिंग होती है और दोनों ओर के सैनिक लौट जाते हैं।
दुमचुक में पलायन की सूचनाओं से भी जीओसी ने इंकार किया। उन्होंने कहा, सीमा पार लांचिंग पैड मौजूद हैं और आतंकी घुसपैठ के लिए तत्पर हैं। राज्य में इसी साल चुनाव भी होने हैं।
आतंकी वारदात करने की फिराक में हैं। इसके अलावा अफगानिस्तान और पाकिस्तान में खराब हालात का भी प्रभाव जम्मू कश्मीर में पड़ सकता है। सेना इन सभी स्थितियों पर नजर रखे हुए है और वर्ष 2014 महत्वपूर्ण और संवेदनशील है, जिसके कारण जम्मू कश्मीर में सशस्त्र बल को दिए गए विशेष अधिकार (अफस्पा) को हटाने के लिए उपयुक्त समय नहीं है।
घुसपैठ करने में आतंकी कामयाब नहीं हों। पिछले साल घुसपैठ की सबसे अधिक कोशिशें हुई हैं। इन कोशिशों को रोकने के लिए विशेष पुख्ता सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। सुरक्षा कारण ही आतंकी घुसपैठ के लिए नए-नए रास्ते तलाश रहे हैं। उन्हें रोकने के लिए काउंटर इंसरजेंसी (सीआई) टीमें पूरी तरह मुस्तैद हैं।