अमरनाथ यात्रा के खिलाफ अलगाववादियों ने साजिश बुननी शुरू कर दी है। खुफिया एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल और अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष एनएन वोहरा को इस बाबत रिपोर्ट सौंपी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आम कश्मीरियों द्वारा खास तवज्जो नहीं मिलने के कारण अलगाववादी पार्टियां हाशिए पर हैं लिहाजा वह अमरनाथ यात्रा के विरोध के बहाने अपना जनाधार विकसित करना चाहते हैं।
उधर आतंकवादी संगठन भी अलग-थलग पड़ गए हैं नतीजतन उन्हें भी मौके की तलाश है। इस हालात ने अलगाववादियों और आतंकवादियों के बीच फिर सेतु बनाया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अलगाववादी दोहरी नीति अपना रहे हैं। एक तरफ उनका संपर्क आतंकवादी संगठनों से बना है और दूसरी ओर वह स्वामी अग्निवेश जैसे संतों के भी संपर्क में हैं।
स्वामी अग्निवेश कश्मीर आकर यात्रा के विरोध के लिए वह पर्यावरण संरक्षण को मुद्दा बना सकते हैं। आम कश्मीरियों को प्रभावित करने के लिए इस यात्रा को कालाहोई ग्लेशियर के लिए खतरा बताया जा रहा है जो कश्मीर का स्थायी जलस्रोत है।
अग्निवेश के एजेंडे के मुताबिक इस ग्लेशियर का आयतन 18 प्रतिशत घटा है और यात्रा के प्रदूषण से इस पर खतरा बढ़ सकता है।
गौरतलब है कि अग्निवेश और हुर्रियत कांफ्रेंस के नेता सैयद अली शाह गिलानी के बीच संपर्क बना हुआ है। गिलानी ने अग्निवेश को कश्मीर आने का न्योता दिया है।
तैनात किए जा रहे जवान
खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद राज्यपाल ने अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा की है। पहाड़ों पर सेना के जवानों को तैनात किया जा रहा है। यात्रा के रास्ते और आधार शिविरों की सुरक्षा में सेना के अलावा अर्धसैनिक बलों को पुलिस जवानों की तैनाती की जा रही है।
सुरक्षा की कमान सेना को सौंप दी गई है। अलगाववादियों की गतिविधियों पर सुरक्षा एजेंसियां नजर रख रही हैं। अमरनाथ यात्रा 28 जून से शुरू हो रही है जो रक्षाबंधन के दिन तक चलेगी।