सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा प्रदान करने के लिए सरकार कराड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है, लेकिन 10वीं बोर्ड के परीक्षा परिणाम इसके उलट हैं। खराब रिजल्ट आने पर शिक्षकों की इंक्रीमेंट रोक दी गई है।
राज्य शिक्षा बोर्ड द्वारा कुछ दिन पहले घोषित किए गए 10वीं कक्षा के परिणाम में सरकारी स्कूलों ने एक बार फिर निराश किया है। जिले में 12 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनका परिणाम शून्य प्रतिशत रहा है।
बोर्ड द्वारा जारी रिजल्ट गैजट के अनुसार शहर के जवाहरनगर स्थित कन्याओं का सरकारी हाई स्कूल, सरकारी हाई स्कूल अंद्रूठ, सरकारी हाई स्कूल बगाला, सरकारी हाई स्कूल धार मंजाकोट, सरकारी हाई स्कूल धराटी, सरकारी हाई स्कूल ढूंगी, सरकारी हाई स्कूल गलहान, सरकारी हाई स्कूल गुंदा, सरकारी हाई स्कूल खंडारियां, सरकारी हाई स्कूल खोड़ीनाड़, सरकारी हाई स्कूल नाड़ धुरियां वह स्कूल हैं जहां का एक भी बच्चा पास नहीं हुआ है।
14 का रिजल्ट 10 प्रतिशत से कम
शिक्षक
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14 सरकारी स्कूलों में 10 प्रतिशत से भी कम रिजल्ट आया है। सरकारी हाई स्कूल अजमताबाद, सरकारी हाई स्कूल बरोह, दब्बर पोठा, ढलेरी, डोडाज दरहाल, गरान, कलालकस्स, कोटली कालाबन, नारला, रंथल, सवारी, ठंडीकस्सी, उधन, जियारत शरीफ, सरकारी हायर सकेंडरी स्कूल बेहरोटी।
जिले में 25 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जिनका परिणाम 20 प्रतिशत से कम है। कन्याओं का सरकारी हाई स्कूल दयाला, सुंदरगली, दरहाल, कन्याओं का सरकारी मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल राजोरी, सरकारी हाई स्कूल चल्लास, धर्मसाल, गलहूटी, गुरदनबाला, कंथोल, केरी कांगड़ा, लाम, सड़ोका, नडियंा, सागरा, सरूला, सवारी नं 2, ककोड़ा, संबेड़ी, मोगला, सियालसुई, त्रियाठ, मसूती वह सरकारी स्कूल हैं, जिनका परीणाम 20 प्रतिशत से भी कम रहा है।
सीईओ राजोरी अल्ताफ हुसैन ने सरकारी स्कूलों के निराशाजनक रिजल्ट पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जिन स्कूलों का परिणाम 20 प्रतिशत से कम है उनके हेड मास्टरों सहित अन्य सभी शिक्षकों की इंकरीमेंट पर रोक लगा दी गई है। इसके इलावा इन सभी शिक्षकों को ट्रंासफर करने की भी योजना बनाई जा रही है।