सवाल: आपका तो परिवार ही कश्मीर की धरती से आता है, जिसके बारे में कहा जाता है कि धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है तो वो कश्मीर में है। आपने यहां जो करारनामा किया है, उसे कैसे देखते हैं?
सुरेश रैना: जम्मू-कश्मीर बहुत ही खूबसूरत जगह है। पिताजी सेना में थे। 2018 में हम जम्मू-कश्मीर बनाम उत्तर प्रदेश का मैच हुआ था। इरफान ने यहां बहुत काम किया है। कई खिलाड़ी यहां से निकले। मैं चाहता था कि जम्मू-कश्मीर को कुछ लौटा सकूं। जब पहली बार खेला था तो यहां से फोन आया कि वापस लौट आओ, लेकिन मैं उत्तर प्रदेश में पैदा हुआ हूं तो पिताजी ने मना किया। भारतीय टीम अभी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। आने वाले समय में हम चाहते हैं कि जम्मू का कोई बच्चा भारतीय टीम में खेले।
सवाल: स्विंग के किंग आप रहे हैं। हमारा पहला नाता जम्मू-कश्मीर से रहा है। आपके प्रयासों के बारे में बताइए। नए खिलाड़ी क्या करें?
इरफान पठान: मुझे और सुरेश रैना को यहां बड़े मंच पर आमंत्रित करने के लिए शुक्रिया। सुरेश रैना भी जम्मू-कश्मीर में आकर कुछ करना चाहते थे इसलिए उन्होंने एमओयू साइन किया। हमने 60 हजार बच्चों को क्रिकेट खिलाया था। फिर कुछ नतीजे मिले। यहां 24 जिले हैं। वहां सभी को क्रिकेट खेलने का मौका मिले, हम यही चाहते थे। दिल्ली के ताज होटल में जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ के पदाधिकारी थे। साथ ही कपिल देव जी थे। वहां मुझे बुलाया गया था। उस वक्त मेरे हाथ में चार लीग थीं। मैंने सोचा था कि रिटायरमेंट के बाद बाहर जाकर खेलूं। एक बड़ा कमर्शियल पहलू भी था। कपिल देव जी ने एक ही बात बोली कि अगर आप जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के साथ जुड़ते हैं तो क्रिकेट को कुछ लौटाने का मौका आपको यहीं मिलेगा। मैंने दो दशक से ज्यादा क्रिकेट खेला हूं। एक हजार विकेट निकाले हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर में दो साल जो मैंने काम किया, वह मेरी जिंदगी के सबसे सुनहरे पल थे।
सवाल: हमें लग रहा था कि विश्व कप हमारा है। फाइनल में कहां चूक हुई?
सुरेश रैना: दिल तो सबका दुखा है। लड़कों ने बहुत मेहनत की थी। हिंदुस्तान की यह विश्व कप में अब तक की सर्वश्रेष्ठ टीम थी। गेंदबाजी देखिए। विराट का 50वां शतक आया। सचिन के होम ग्राउंड पर उनके सामने शतक बनाया। एक मैच खराब गया तो टीम को जज नहीं करना चाहिए। हम अच्छा खेले। रोहित अगर आउट नहीं होते तो हमने 325 रन बना दिए होते। कम स्कोर होता है तो उसे बचाना मुश्किल होता है। अगर चालीस-पचास रन और बने होते तो स्टेडियम गूंज रहा होता। वहां विकेट स्लो था। ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाजी की तारीफ करनी होगी। ट्रेविस हेड ने बहुत अच्छा कैच पकड़ा।
सवाल: फाइनल मैच को आप कैसे देखते हैं? पिच पढ़ने में क्या गलती हुई?
इरफान पठान: मैच के एक दिन पहले कुछ सवालों के जवाब दिए थे। मेरा यही कहना था कि पूरी टीम सोच रही होगी कि टॉस जीतकर बल्लेबाजी करें। मैं अहमदाबाद की पिच जानता हूं। वहां लक्ष्य का पीछा करना ज्यादा सही रहता। पाकिस्तान को हमने 200 भी नहीं बनाने दिए। न्यूजीलैंड भी लक्ष्य का पीछा करते हुए जीता था। हर मौसम में वहां की पिच अलग तरह से बिहेव करती है। नमी की वजह से भी पिच सैटल हो जाती है। मेरा मानना था कि टीम को टॉस जीतकर लक्ष्य का पीछा करना चाहिए। हालांकि, फिर भी हमने लड़ाई की। जब हम बैटिंग कर रहे थे तो देख रहे थे कि ज्यादा बल्लेबाजी नहीं बची है। जब रोहित आउट हुए, उसके बाद भी हम 300 बना सकते थे। जब हमने 240 बनाए तो खेल वहीं खत्म हो गया।