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सुंजवां आतंकी हमला: जब गोलीबारी के बीच ढाल बन गए JCO मदनलाल

Mon, 12 Feb 2018 10:08 AM IST
एस खजूरिया, कठुआ
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जम्मू और कश्मीर के रिहायशी इलाके सुंजवां में आतंकियों ने सेना के कैंप को अपना निशाना बनाया। इस हमले में शहीद हुए सूबेदार मदन लाल चौधरी के पार्थिव शरीर को पुष्पांजलि अर्पित की गई है। हमले के दौरान आतंकियों ने सूबेदार मदन लाल ही नहीं उनके पूरे परिवार पर घेर कर हमला किया। शहीद की पत्नी ने आपबीती में खौफनाक मंजर की दर्दनाक कहानी बयां की।

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सुबह के लगभग साढ़े चार बजे बाहर फायरिंग शुरू हो गई। अचानक गोलियों की आवाज सुनकर सूबेदार मदनलाल और उनकी पत्नी चरणजीत कौर जग गए। मदनलाल खिड़की की तरफ गए और तुरंत वापस आ गए। उन्होंने बिस्तर पर रखा फोन अपनी जेब में डाला और बाहर जाने लगे। पत्नी ने टोका तो मदन लाल बोले- पंगा हो गया है कोई। मैं यूनिट में फोन करता हूं। इतना कह कर वह कमरे के दरवाजे के बाहर निकल गए। जैसे ही वह बाहरी दरवाजे पर पहुंचे आतंकियों ने अंदर घुसने की कोशिश की। वे दरवाजे पर ढाल बन कर खड़े हो गए। अतंकियों ने उनके सीने पर करीब से गोली मार दी।
 



फायरिंग की आवाज सुनकर बेटी दरवाजे की ओर भागी। उसे भी गोली लगी और वो घायल हो गई। आतंकी दरवाजा खुलवाने में कामयाब नहीं हुए तो आगे बढ़ गए। इस तरह परिवार के बाकी चार सदस्यों की जान बच गई। बाहर से फायरिंग देख मदनलाल के भतीजे ने अंदर का दरवाजा बंद कर लिया। 
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आतंकियों के हमले का पहला शिकार मदनलाल का परिवार हुआ। मदनलाल ने आतंकियों को अपने घर में घुसने नहीं दिया। उनके सीने पर गोली लगी। वे शहीद हो गए। एक गोली उनकी बेटी को भी लगी। इस घटना की चश्मदीद पत्नी चरणजीत सदमे में हैं। उसे भी छर्रे लगे। वह उस मंजर को भूल नहीं पा रहीं। छर्रे लगने से घायल चरणजीत कौर इलाज के बाद कठुआ के राजबाग से सटे बकराक गांव स्थित अपने घर पहुंची तो कराह रही थीं।

श्रीमती कौर ने रोते हुए अमर उजाला को बताया कि उनके जेठ का बेटा भी उनके घर आया हुआ था। वह बाहर लॉबी में सोया था। गोलियों की आवाज सुनकर जैसे ही मदनलाल बाहर जाने लगे तभी घर के मुख्य दरवाजे पर दस्तक होने लगी। जेठ का बेटा संदीप दरवाजा खोलने के लिए बढ़ा तो पति मदनलाल ने बाजू पकड़कर उसे परिवार के अन्य सदस्यों के साथ कमरे के भीतर जाने के लिए कहा। 

वो कहती हैं- मैं दरवाजा खोल बाहर चली जाती तो शायद साहब मुझसे जरूर बात करते, लेकिन मुझे संदीप ने दरवाजा नहीं खोलने दिया। मेरे साहब को सीने पर गोली लगी थी और वह लॉबी में लहूलुहान गिरे पड़े तड़प रहे थे। 

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टार्च की रोशनी से मदद मांगती रही कौर

शहीद जेसीओ मदन लाल की पत्नी ने दहशत के वो पल गुजारे जिसमें उन्होंने पति की मौत को काफी करीब से देखा, लेकिन उन्हें मलाल यह था कि घायल मदनलाल की मदद नहीं कर पाईं। चरणजीत कौर ने बताया कि सुबह साढ़े चार बजे हमला हुआ, लेकिन मदद पहुंचते कई घंटे लग गए। इस बीच कई बार उन्होंने इशारे कर और टार्च की लाइट जलाकर भी मदद मांगने की कोशिश की।

वह बाहर वालों पर चिल्लाती रही कि यहां कोई नहीं है साहेब को आकर बचाओ।  लेकिन इस अफरातफरी में कोई भी मदद के लिए नहीं आया। उन्होंने कहा कि समय पर राहत पहुंच जाती तो शायद मदनलाल की जान बच जाती, लेकिन सेना सुबह नौ बजे के बाद उन तक पहुंच पाई। तब तक वह मदन लाल को हमेशा के लिए गंवा चुकी थीं। 
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