शहीद जेसीओ मदन लाल की पत्नी ने दहशत के वो पल गुजारे जिसमें उन्होंने पति की मौत को काफी करीब से देखा, लेकिन उन्हें मलाल यह था कि घायल मदनलाल की मदद नहीं कर पाईं। चरणजीत कौर ने बताया कि सुबह साढ़े चार बजे हमला हुआ, लेकिन मदद पहुंचते कई घंटे लग गए। इस बीच कई बार उन्होंने इशारे कर और टार्च की लाइट जलाकर भी मदद मांगने की कोशिश की।
वह बाहर वालों पर चिल्लाती रही कि यहां कोई नहीं है साहेब को आकर बचाओ। लेकिन इस अफरातफरी में कोई भी मदद के लिए नहीं आया। उन्होंने कहा कि समय पर राहत पहुंच जाती तो शायद मदनलाल की जान बच जाती, लेकिन सेना सुबह नौ बजे के बाद उन तक पहुंच पाई। तब तक वह मदन लाल को हमेशा के लिए गंवा चुकी थीं।