जोजिला सुरंग का काम जून के पहले हफ्ते तक खोदाई पूरी होने की उम्मीद है और इसे फरवरी 2028 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। यह सुरंग कश्मीर और लद्दाख के बीच सालभर निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी, जिससे नागरिक, सेना और पर्यटन सभी को बड़ा फायदा मिलेगा।
देश के सबसे रणनीतिक महत्व वाले प्रोजेक्ट्स में से जोजिला सुरंग की खोदाई जून के पहले हफ्ते तक पूरी हो जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, सुरंग को फरवरी 2028 तक पूरी तरह से शुरू करने का लक्ष्य है। काम पूरा पर यह कश्मीर और लद्दाख के बीच कनेक्टिविटी को पूरी तरह से बदल देगी, खासकर सर्दियों में जोजिला दर्रे में भारी बर्फबारी के कारण होने वाली समस्याओं को हल कर देगी। वर्तमान में जोजिला दर्रा छह माह तक बंद रहता है जिससे लद्दाख सर्दियों में बाकी दुनिया से कट जाता है। इस सुरंग से कश्मीर-लद्दाख के बीच सालभर निर्बाध यातायात सुनिश्चित होगा। यह एशिया की सबसे लंबी दो-तरफा सड़क सुरंग होगी जो हिमालय के मुश्किल इलाकों से गुजरते हुए एक सुरक्षित और विश्वसनीय रास्ता प्रदान करेगी।
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सुरक्षा क्वच और होगा मजबूत
जोजिला सुरंग से सिर्फ नागरिकों को ही फायदा नहीं होगा बल्कि इससे सेना की लॉजिस्टिक आवाजाही में भी तेजी आएगी। सीमावर्ती क्षेत्रों में सैनिकों व भारी साजो-सामान की तुरंत आपूर्ति होगी। देश का रक्षा क्वच और मजबूत होगा। गलवान संघर्ष के दौरान जमीनी स्तर पर लॉजिस्टिक्स की चुनौतियों ने इस परियोजना की अहमियत को और बढ़ा दिया था।
पर्यटन लाभ
परियोजना प्रमुख हरपाल सिंह ने बताया कि सुरंग शुरू होने से यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। पर्यटन बढ़ेगा। स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच होगी। जरूरी सामान किफायती दरों पर उपलब्ध होंगे। द्रास, कारगिल जैसे इलाकों को भी लगातार कनेक्टिविटी बनी रहेगी। सुरंग के साथ, जेड मोड़ सुरंग, शिंकुला सुरंग और सेला सुरंग जैसी पूरक परियोजनाओं को जोड़ने के बाद यह सुरंग देश की उत्तरी सीमाओं तक हर मौसम में कनेक्टिविटी बनी रहेगी। यह सिर्फ एक बुनियादी ढांचा नहीं बल्कि यह कनेक्टिविटी को मजबूत करने, आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने वाली एक जीवनरेखा साबित होगी।
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खोदाई की प्रक्रिया और तकनीकी चुनौतियां
सुरंग की खोदाई दो सिरों से की जा रही है-गांदरबल की तरफ पश्चिमी पोर्टल और लद्दाख की तरफ पूर्वी पोर्टल से। 4,500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से इस प्रोजेक्ट को पूरा किया जा रहा है। सुरंग की चौड़ाई 9.5 मीटर और ऊंचाई 7.57 मीटर होगी। यह घोड़े की नाल के आकार में डिजाइन की जा रही है।
प्रोजेक्ट पूरा करने में कई गंभीर चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है। हिमालय की कमजोर भूगर्भिक संरचना, शून्य से नीचे तापमान (-45°C तक), पानी का रिसाव, और हिमस्खलन जैसी समस्याएं इसके निर्माण में अवरोध डालती हैं। जनवरी 2023 में हिमस्खलन में दो कर्मचारियों की जान चली गई और भारी नुकसान हुआ जिससे लगभग डेढ़ महीने तक काम रोक दिया गया था। इसके बावजूद सुरंग बनाने के लिए उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड से खोदाई को सुरक्षित और कुशल बनाया गया है।