जोजिला सुरंग परियोजना ने एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है, जब हिमालय के भीतर आखिरी 2.5 मीटर हिस्से में ब्लास्ट कर दोनों छोरों को जोड़ दिया गया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ कश्मीर घाटी और लद्दाख के बीच सालभर संपर्क का सपना और करीब आ गया है।
करीब 13.153 किलोमीटर लंबी यह सुरंग फरवरी 2028 तक आम लोगों के लिए खोले जाने की संभावना है, जिससे यात्रा समय 1-1.5 घंटे से घटकर मात्र 15 मिनट रह जाएगा। यह परियोजना रणनीतिक और नागरिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ब्रेकथ्रू समारोह से पहले भू-तकनीकी विशेषज्ञ जनक सिंह राठौड़ ने इस विशाल और अत्यधिक ऊंचाई वाली सुरंग का सफलतापूर्वक निर्माण करने के लिए टीम को बधाई दी। राठौड़ ने कहा, यह दुनिया की सबसे ऊंची और एशिया की सबसे लंबी सुरंग है जो पूरे देश के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। यह एक रणनीतिक परियोजना है। इससे रक्षा उद्देश्यों के लिए साल भर आवाजाही सुनिश्चित होगी। यह पर्यटन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। पहले पर्यटक श्रीनगर में फंस जाते थे और लद्दाख नहीं पहुंच पाते थे। अब वे विंटर स्पोर्ट्स सहित इस पूरे क्षेत्र तक पहुंच सकते हैं। यह पर्यटन और अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा कदम है।
जम्मू-कश्मीर के जोजिला सुरंग में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल हुआ है, जहां ब्लास्ट के जरिए' ब्रेकथ्रू' पूरा किया गया। यह देश की सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक है जो कश्मीर घाटी और लद्दाख के बीच हर मौसम में संपर्क स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
इस मौके पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ईस्ट पोर्टल के पास रिमोट दबाकर ब्रेकथ्रू को अंजाम दिया। कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी मौजूद रहे।
यह सुरंग 13.153 किलोमीटर लंबी, 9.5 मीटर चौड़ी और 7.57 मीटर ऊंची है तथा लगभग 11,578 फीट की ऊंचाई पर बनाई जा रही है। यह श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है और बालटाल (गांदरबल) को मिनीमार्ग (द्रास) से जोड़ती है।
इसके शुरू होने के बाद कश्मीर और लद्दाख के बीच यात्रा समय 1-1.5 घंटे से घटकर लगभग 15 मिनट रह जाएगा। यह परियोजना न केवल नागरिक बल्कि सैन्य आवागमन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिससे पूरे क्षेत्र में कनेक्टिविटी और सुरक्षा दोनों मजबूत होंगी।
पहले यह क्षेत्र करीब छह महीने तक सर्दियों में कट जाता था जिससे लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। 2014 में सरकार बनने के बाद जोजिला सुरंग परियोजना को आगे बढ़ाया गया, जिसे अब तेजी से पूरा किया जा रहा है।
12,000 करोड़ की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को लगभग 7,000 करोड़ में पूरा करने का लक्ष्य है जिससे करीब 5,000 करोड़ की बचत होगी। उन्होंने परियोजना में सहयोग के लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन और स्थानीय लोगों का आभार जताते हुए सभी संबंधित लोगों को बधाई दी।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि आज का दिन भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर के इतिहास में एक सुनहरा अवसर है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए एक जीवनरेखा साबित होगी।
उन्होंने सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बेहद कठिन परिस्थितियों, शून्य से नीचे तापमान के बावजूद इंजीनियरों और कर्मचारियों ने इस परियोजना पर लगातार काम किया। उन्होंने यह भी बताया कि इस निर्माण कार्य में लगभग 80 प्रतिशत मजदूर स्थानीय क्षेत्र से थे। यह सुरंग वर्ल्ड-क्लास सुरक्षा मानकों के साथ बनाई गई है और यह देश के बुनियादी ढांचे में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि आज का दिन भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर के इतिहास में एक सुनहरा अवसर है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए एक जीवनरेखा साबित होगी।
उन्होंने सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बेहद कठिन परिस्थितियों, शून्य से नीचे तापमान के बावजूद इंजीनियरों और कर्मचारियों ने इस परियोजना पर लगातार काम किया। उन्होंने यह भी बताया कि इस निर्माण कार्य में लगभग 80 प्रतिशत मजदूर स्थानीय क्षेत्र से थे। यह सुरंग वर्ल्ड-क्लास सुरक्षा मानकों के साथ बनाई गई है और यह देश के बुनियादी ढांचे में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि यह लद्दाख के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है, क्योंकि ऑल-वेदर कनेक्टिविटी की दिशा में यह अंतिम महत्वपूर्ण पड़ाव है।
उन्होंने इस उपलब्धि के लिए लोगों को बधाई दी और कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले इंजीनियरों तथा कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की। मनोज सिन्हा ने कहा कि इस तरह की परियोजनाएं क्षेत्र में विकास, समृद्धि और बेहतर संपर्क को बढ़ावा देती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में चल रहे बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों से पर्यटन और व्यापार को नई गति मिलेगी तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूती प्राप्त होगी।
जम्मू-कश्मीर में स्थित जोजिला सुरंग से जुड़े महत्वपूर्ण दृश्य सामने आए हैं। यह सुरंग एशिया की सबसे लंबी द्वि-दिशात्मक सड़क सुरंग मानी जाती है जिसकी लंबाई 13.15 किलोमीटर है।
करीब 6,500 करोड़ की लागत से बन रही यह सुरंग कश्मीर और लद्दाख के बीच हर मौसम में बेहतर और निर्बाध सड़क संपर्क स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने लद्दाख के लोगों को बधाई देते हुए कहा कि यह दिन क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक है। उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और मंत्रालय के अधिकारियों को बधाई दी कि वे ऑल-वेदर कनेक्टिविटी टनल को लोगों को समर्पित कर रहे हैं।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह परियोजना लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के लिए विकास का एक बड़ा कदम है और इससे पूरे क्षेत्र में बेहतर संपर्क स्थापित होगा। उन्होंने कारगिल को देश के बाकी हिस्सों से बेहतर तरीके से जोड़ने की अपील भी की और कहा कि अतीत में इस दिशा में प्रयास सफल नहीं हो पाए, लेकिन अब नई उम्मीदें हैं कि बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी।
जम्मू-कश्मीर में स्थित जोजिला सुरंग से जुड़े महत्वपूर्ण दृश्य सामने आए हैं। यह सुरंग एशिया की सबसे लंबी द्वि-दिशात्मक सड़क सुरंग मानी जाती है जिसकी लंबाई 13.15 किलोमीटर है। करीब 6,500 करोड़ की लागत से बन रही यह सुरंग कश्मीर और लद्दाख के बीच हर मौसम में बेहतर और निर्बाध सड़क संपर्क स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
#WATCH | Jammu and Kashmir: Visuals from Zojila Tunnel, which stands as the longest bi-directional road tunnel on the Asian continent, measuring 13.15 kilometres in length.
The symbolic excavation of the final wall of rock at the Zojila tunnel, a project worth Rs 6,500 crore,… pic.twitter.com/ovpkxt3VzW— ANI (@ANI) June 9, 2026
भू-तकनीकी विशेषज्ञ जनक सिंह राठौर ने जम्मू-कश्मीर में बन रही जोजिला सुरंग को एक बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि यह सुरंग दुनिया की सबसे ऊंचाई पर स्थित और एशिया की सबसे लंबी सुरंगों में से एक है, जो देश के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजना है।
उन्होंने बताया कि यह सुरंग रक्षा के लिहाज से बेहद अहम है क्योंकि यह पूरे साल चलने वाला मार्ग उपलब्ध कराएगी जिससे सेना और रसद की आवाजाही हर मौसम में संभव होगी। पहले सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण श्रीनगर और लद्दाख के बीच संपर्क टूट जाता था, जिससे पर्यटक कई बार फंस जाते थे, लेकिन अब यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
यह परियोजना पर्यटन और अर्थव्यवस्था के लिए भी बहुत लाभकारी होगी। अब पर्यटक सर्दियों में भी लद्दाख तक आसानी से पहुंच सकेंगे और विंटर स्पोर्ट्स जैसे गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि परियोजना का लगभग 50% काम पूरा हो चुका है और इसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, वेंटिलेशन सिस्टम सहित कुछ महत्वपूर्ण कार्य अभी बाकी हैं, जिन्हें डिजाइन के अनुसार जल्द पूरा किया जाएगा।
जम्मू-कश्मीर में बन रही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जोजिला सुरंग परियोजना को लेकर ऑथोरिटी इंजीनियर यूसुफ ने कहा है कि परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, जबकि बाकी 20 प्रतिशत कार्य को पूरा करने में करीब दो साल और लग सकते हैं।
आईसीटी एआईएपीएल का प्रतिनिधित्व कर रहे यूसुफ ने बताया कि सुरंग में ब्रेकथ्रू एक बड़ी उपलब्धि है और इससे परियोजना के निर्माण कार्य में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज हुई है। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था के तहत परियोजना को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया गया है।
लद्दाख को हर मौसम में कश्मीर और शेष भारत से जोड़ने वाली सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण जोजिला सुरंग के निर्माण में मंगलवार को एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई। सुरंग के भीतर अंतिम चट्टानी दीवार को ब्लास्ट के जरिए सफलतापूर्वक तोड़ दिया गया, जिसे इंजीनियरिंग की भाषा में ब्रेकथ्रू कहा जाता है।
इस अंतिम सफल विस्फोट के साथ ही सुरंग के दोनों छोर अब पूरी तरह आपस में जुड़ गए हैं, जिससे परियोजना के निर्माण कार्य में एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है।
यह उपलब्धि परियोजना के निर्माण कार्य में एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है, जिससे कश्मीर घाटी और लद्दाख के बीच सालभर निर्बाध सड़क संपर्क स्थापित करने की दिशा में कार्य और तेज हो जाएगा।