सुबह मंत्रिमंडल से ड्रॉप होने के बाद नाराज होकर बाहर निकले मुबारक गुल को शाम होने तक पार्टी की तरफ से महासचिव के पद से नवाज दिया गया। उन्हें समर्थकों के प्रदर्शन का भी फायदा मिला है। हालांकि आंसू बहाने वाले अब्दुल मजीद लारमी पर कोई फैसला नहीं हो पाया है। कश्मीर के अलावा जम्मू संभाग में पीर पंजाल के विधायकों को मनाना भी पार्टी के लिए चुनौती साबित होने वाली है।
कश्मीर की 33 सीटों पर सात जम्मू की आठ सीटों पर दो मंत्री
नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास कश्मीर संभाग में 47 में से 33 सीटें हैं। अब इस संभाग में मंत्रियों की संख्या मुख्यमंत्री समेत तीन से बढ़कर सात हो गई है। जम्मू संभाग में कुल 43 सीटें हैं और इनमें से नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास आठ विधायक हैं। यहां उपमुख्यमंत्री समेत अब दो ही मंत्री होंगे। जम्मू संभाग में भाजपा सबसे बड़ा राजनीतिक दल है और पार्टी के सभी 29 विधायक इसी संभाग से हैं। खास बात यह है कि जम्मू में हिंदू आबादी बहुसंख्य है। यहां अब नेकां की गतिविधियां उपमुख्यमंत्री पर ज्यादा केंद्रित होंगी।
सांसद का इस्तीफा और उपचुनाव भी चिंता
नेकां के लिए असल परीक्षा सांसद आगा रुहुल्ला मेहदी के इस्तीफे के साथ शुरू होने वाली है। श्रीनगर से सांसद रुहुल्ला ने करीब 1.88 लाख के अंतर से चुनाव जीता था। नेकां में रहते उन्हें 3.56 लाख वोट मिले थे। इस्तीफा देने के बाद रुहुल्ला निर्दलीय सांसद का चुनाव लड़ते हैं तो नेकां के लिए यहां वापसी मुश्किल हो सकती है। हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार नेकां लोकसभा उपचुनाव को शिया बनाम सुन्नी करवाने में कामयाब हुई तो इसका असर परिणाम में देखने को मिलेगा। घाटी में सुन्नी के मुकाबले शिया आबादी कम है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस और सांसद पद से इस्तीफा तय है। तीन नवंबर को दोनों पद छोड़ दूंगा। इस निर्णय में कोई बदलाव नहीं है। इस्तीफा देने के बाद आगामी रणनीति पर काम शुरू होगा। -आगा रुहुल्ला मेहदी, सांसद