लारमी की मांग के बाद भाजपा विधायकों ने विरोध जताते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। भाजपा नेताओं ने महाराजा हरि सिंह के समर्थन में नारे लगाए और कहा कि उनकी जयंती पर घोषित अवकाश को रद्द करने की बात स्वीकार नहीं की जा सकती। भाजपा विधायक पवन गुप्ता समेत अन्य नेताओं ने इस मुद्दे पर आपत्ति जताई। वहीं, एनसी नेताओं ने शेख अब्दुल्ला से जुड़े अवकाश बहाल करने की मांग का समर्थन किया।
पीडीपी विधायक वहीद पारा ने भी 13 जुलाई को मनाए जाने वाले 1931 के शहीद दिवस को राज्य अवकाश के रूप में बहाल करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि यह दिन जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक जागृति से जुड़ा है और इसे फिर से सरकारी अवकाश बनाया जाना चाहिए। इस मुद्दे पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई।
हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने सदस्यों से सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों की भावनाएं सुनी गई हैं और शोर-शराबे से मुद्दों का समाधान नहीं होगा। अध्यक्ष ने कहा कि यदि सदस्य इन मुद्दों पर बहस चाहते हैं तो इसके लिए आगे समय दिया जा सकता है, लेकिन फिलहाल सूचीबद्ध कार्यवाही चलने दी जाए।
भाजपा विधायकों ने इसके बाद सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और सदन से वॉकआउट कर दिया। बाहर निकलते समय कांग्रेस विधायक युद्धवीर सेठी के साथ भी भाजपा सदस्यों की तीखी नोकझोंक हुई। हालांकि सेठी सदन में बैठे रहे और अपने सवाल का जवाब सुना। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस दौरान कहा कि यही अंतर है उन विधायकों में जो लोगों के मुद्दे उठाने के लिए सदन में आते हैं और उन लोगों में जो वॉकआउट करते हैं।
बाद में भाजपा विधायक सदन में लौट आए। पावर एमनेस्टी को लेकर विधायक मेहराज मलिक के पूरक सवाल का जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने हंगामा किया और वेल में जाने की कोशिश की, लेकिन मार्शलों ने उन्हें रोक दिया। अध्यक्ष ने उन्हें अपनी सीट पर बैठने और सदन की मर्यादा बनाए रखने की चेतावनी दी। इसके बाद मेहराज मलिक सदन से बाहर चले गए।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच भाजपा नेताओं ने सरकार पर बिजली-पानी और अन्य जनसमस्याओं को लेकर भी निशाना साधा। वहीं, अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि सदन की कार्यवाही निर्धारित रूल ऑफ बिजनेस के अनुसार ही चलेगी।