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ईद-ए-मिलाद पर गरमाई सियासत: गैर-निर्वाचित सरकार ने जानबूझकर लिया छुट्टी न बदलने का फैसला; बोले उमर अब्दुल्ला

Sat, 06 Sep 2025 11:37 AM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर/जम्मू

सार

ईद-ए-मिलाद की छुट्टी को इस्लामी कैलेंडर के अनुसार संशोधित न करने पर जम्मू-कश्मीर में सियासी और धार्मिक विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला समेत कई नेताओं और धर्मगुरुओं ने गैर-निर्वाचित सरकार पर भावनाएं आहत करने का आरोप लगाया है।
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जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला - फोटो : ANI
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विस्तार
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प्रदेश में एक बार फिर छुट्टियों को लेकर सियासत में उबाल है। विवाद की शुरुआत ईद-ए-मिलाद-उन-नबी की छुट्टी को संशोधित न किए जाने पर शिक्षा व चिकित्सा मंत्री सकीना इत्तू के सोशल मीडिया पोस्ट से हुई। उन्होंने इस्लामी कैलेंडर के अनुसार छुट्टी को शुक्रवार के बजाय शनिवार को न किए जाने पर नाराजगी जताते हुए इसे अन्यायपूर्ण कहा।

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मंत्री की पोस्ट के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने छुट्टी संशोधित न करने पर एलजी प्रशासन को आड़े हाथ लिया। उमर ने इसे गैर-निर्वाचित सरकार का अविवेकी कदम करार दिया। इसके बाद मीरवाइज उमर फारूक से लेकर ग्रैंड मुफ्ती और पीडीपी-कांग्रेस भी विरोध में उतर आए।

सरकारी कैलेंडर के अनुसार ईद-ए-मिलाद-उन-नबी की छुट्टी पांच सितंबर (शुक्रवार) को तय थी। जबकि इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में यह त्योहार शनिवार यानी छह सितंबर को पड़ रहा था। इस कारण इसे संशोधित कर पांच के बजाय छह सितंबर को करने के लिए राजस्व विभाग की ओर से एक पत्र सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) को भेजा गया था। इसके बावजूद तारीख में संशोधन नहीं किए जाने पर कैबिनेट मंत्री सकीना इत्तू ने सबसे पहले नाराजगी जताई।

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इस्लामी चंद्र कैलेंडर (लूनर कैलेंडर) के अनुसार जम्मू-कश्मीर में शनिवार को ईद-ए-मिलाद मनाई जानी थी, लेकिन प्रशासन ने पहले से जारी छुट्टियों के कैलेंडर में बदलाव नहीं किया। इस कारण सरकारी छुट्टी शुक्रवार को ही रही। इस पर कैबिनेट मंत्री सकीना इत्तू ने नाराजगी जताई।

उन्होंने कहा कि निर्वाचित सरकार के आग्रह के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के मुसलमानों के लिए यह एक पवित्र दिन है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में इसे सही तारीख पर नहीं मनाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि चांद दिखने के आधार पर अवकाश तय करने का क्या मतलब है, अगर उसका पालन नहीं करना है। मंत्री ने कहा कि इस तरह के फैसले लेने का अधिकार चुनी हुई सरकार को होना चाहिए।

मंत्री की पोस्ट के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक कैलेंडर की फोटो साझा करते हुए कहा कि इसमें साफ लिखा है कि छुट्टी ''चांद दिखने पर'' आधारित है। इसका मतलब है कि चांद दिखने के आधार पर छुट्टी की तारीख बदली जा सकती है। उमर ने आरोप लगाया कि गैर-निर्वाचित सरकार ने जानबूझकर छुट्टी में संशोधन नहीं किया, जिससे लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं।

बता दें कि उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार ने बीते दिनों पांच दिसंबर और 13 जुलाई की छुट्टी बहाल करने की मांग भी की थी। इसके लिए एक प्रस्ताव बनाकर उनकी सरकार ने एलजी प्रशासन को भेजा था। ये दोनों छुट्टियां अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद रद्द कर दी गई थीं।

मीरवाइज ने निर्वाचित व गैर-निर्वाचित सरकार दोनों की निंदा की
हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने छुट्टी संशोधित न करने पर ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के पवित्र अवसर की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने इस मामले में निर्वाचित व गैर-निर्वाचित दोनों सरकारों की निंदा की।

पीडीपी ने कहा- दुर्भाग्यपूर्ण
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता इल्तिजा मुफ्ती ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जम्मू-कश्मीर में सही दिन पर ईद-ए-मिलाद नहीं मना सकते हैं। उन्होंने नेशनल कांफ्रेंस सरकार पर भी निशाना साधा और कहा कि बहुमत के बावजूद वे इस तरह के फैसले को वैध बना देती है।

ग्रैंड मुफ्ती ने कहा- यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण
जम्मू-कश्मीर के ग्रैंड मुफ्ती नासिर उल इस्लाम ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि चांद दिखने के अनुसार ईद-ए-मिलाद शनिवार को पड़ने के बावजूद सरकार उसके अनुसार अधिसूचना जारी करने में विफल रही। यह पूरी तरह से बेमेल है और आध्यात्मिक व धार्मिक महत्व रखने वाले एक पवित्र दिन के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
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सभी धर्मों का सम्मान जरूरी : कांग्रेस
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रविंदर शर्मा ने कहा कि जो त्योहार जिस दिन है, उसी दिन मनाया जाना चाहिए। सभी धर्मों का सम्मान जरूरी है। छुट्टी को पुनर्निर्धारित करना बहुत बड़ी बात नहीं थी। त्योहार और धर्म में आस्था को ध्यान में रखते हुए कई फैसले लेने पड़ते हैं।
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