आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) अब वैश्चिक स्तर पर बेनकाब हो गया है। अमेरिका ने इसे विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया है। रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि अब टीआरएफ की जम्मू-कश्मीर में गतिविधियां कम होंगी। खासकर इस संगठन को होने वाली फंडिंग पर अंकुश लगेगा। विदेशों से इसका नेटवर्क चलाने वालों पर कार्रवाई आसान होगी।
सेना के रिटायर मेजर जनरल आरके शर्मा का कहना है कि लश्कर व जैश जैसे संगठन पाकिस्तान से ऑपरेट होते हैं, जो पहले से आतंकी संगठन घोषित हैं। इससे इनकी फंडिंग की कमर टूटी। इसलिए लश्कर ने टीआरएफ खड़ा कर दिया, ताकि फंडिंग मिल सके। अब इसे भी आतंकी संगठन घोषित करने से पाकिस्तान पर और दबाव बढ़ेगा। इससे टीआरएफ के खिलाफ कार्रवाई करने में मदद मिलेगी। ये भारत की एक कूटनीतिक जीत है।
अब यूएन भी इसे आतंकी संगठन घोषित करेअब संयुक्त राष्ट्र को भी चाहिए कि इसे आतंकी संगठन घोषित करे। अगली कोशिश भारत की यहीं होनी चाहिए। हालांकि इसमें चीन अड़ंगा डालेगा, लेकिन इससे हम कुछ नहीं गंवाएंगे। टीआरएफ के जरिए पाकिस्तान विश्व को गुमराह करने का प्रयास कर रहा था कि इसमें कश्मीर के स्थानीय युवा शामिल हैं, जबकि इसमें 90 फीसदी विदेशी आतंकी हैं।
एसपी वैद, पूर्व डीजीपी