पुलवामा में माैजूद 400 साल पुरानी मुगलकालीन मस्जिद की हालत।
- फोटो : अमर उजाला
यह मस्जिद मुगल काल की उन विरल संरचनाओं में से एक है जो आज भी अपना अस्तित्व बनाए हुए है। स्थानीय लोगों ने दशकों से इसके संरक्षण की मांग की थी। मौसम की मार और रखरखाव के अभाव में इमारत में दरारें आ गई थीं और कई हिस्से कमजोर हो गए थे।शादीमर्ग निवासी शाहिद नजीर ने कहा कि यह मस्जिद हमारे गौरवशाली अतीत की जीवंत याद दिलाती है। इसकी शिल्पकला और संरचनात्मक शैली मुगल प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
मस्जिद की जर्जर दीवारें।
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अधिकारियों का कहना है कि जीर्णोद्धार कार्य मस्जिद के मूल वास्तुशिल्प स्वरूप को बनाए रखते हुए किया जाएगा। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इससे न केवल यह ऐतिहासिक संरचना सुरक्षित होगी, बल्कि पुलवामा में विरासत पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
मस्जिद की जर्जर दीवारें।
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एक अन्य स्थानीय निवासी फारूक अहमद ने कहा कि यह स्थल विरासत पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण क्षमता रखता है। जीर्णोद्धार के बाद यह देशी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है। सरकार के इस कदम से क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में भी मदद मिलने की उम्मीद है।