नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर पदयात्रा
- फोटो : अमर उजाला
यात्रा का यह पड़ाव कई मायने में खास रहा। पहला तो यही कि उपराज्यपाल ने संवेदनशील बांदीपुरा जिला मुख्यालय को इसके लिए चुना। यह उत्तरी कश्मीर का वही हिस्सा है, जो आतंक, नार्को टेरर, घुसपैठ और देश विरोधी गतिविधियों के लिए कभी चर्चा में रहा है। उसी बांदीपुरा में मनोज सिन्हा सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए लोगों के बीच पहुंचे। उनसे सीधे बात की। यात्रा की अहमियत समझाई। बताया कि यह घर की लड़ाई है। इसे हम सभी को मिलकर लड़ना और जीतना भी है। हम अपने बच्चों को नशे के मकड़जाल में फंसकर यूं बर्बाद होते नहीं देख सकते। मेरा हर पल जम्मू-कश्मीर के नाम है। संविधान की सौगंध है...नार्को टेरर को मिटाकर ही दम लेंगे।
नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर पदयात्रा
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बांदीपोरा क्षेत्र से लाइन ऑफ कंट्रोल की दूरी लगभग 45 किलोमीटर है। इसलिए सेना और सुरक्षा एजेंसियों के लिए इसे संवेदनशील माना जाता है। यहां आज भी शेख वसीम बारी की हत्या लोगों को झकझोर कर रख देती है। वह उत्तर कश्मीर में भाजपा का प्रमुख चेहरा थे। वर्ष 2020 में उनकी, उनके पिता और भाई की आतंकियों ने हत्या कर दी। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने कुख्यात समंदर चाचा के नाम से चर्चित बागू खान को ढेर कर दिया। बाद में उमर लोन को भी मार गिराया। हालांकि इस बीच सीआरपीएफ कैंप पर फिदायीन हमले भी हुए। लश्कर के द रेजिस्टेंस फ्रंट मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ।
नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर पदयात्रा
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पुलिस ने जमीनी स्तर पर काम करने वाले आतंकियों के सहयोगियों (ओजीडब्ल्यू) नेटवर्क को तोड़ने का प्रयास किया। हथियार और लॉजिस्टिक सपोर्ट सिस्टम को भी ध्वस्त करना शुरू किया। आज बांदीपुरा अपने इस अतीत को पीछे छोड़ विकास की राह पर बढ़ चला है। लेकिन नशा तस्करों का मजबूत नेटवर्क अब भी परेशान करता है। उसी बांदीपुरा में सोमवार को उपराज्यपाल ने मशहूर शायर जिगर मुरादाबादी की पंक्तियों...जो तूफानों में पलते जा रहे हैं, वही दुनिया बदलते जा रहे हैं। निखरता आ रहा है रंग-ए-गुलशन, खस ओ खाशाक जलते जा रहे हैं (जैसे बगीचा तब और सुंदर दिखता है, जब उसकी सूखी घास-फूस हट या जल जाती है, उसी तरह समाज या जीवन भी कठिन दौर, बुराइयों या बेकार तत्वों के खत्म होने के बाद और निखरता है।) से नशे के विरुद्ध युद्ध में साथ आने का आह्वान किया।