भारतीय वायुसेना की 114 हेलीकॉप्टर यूनिट जिसे सियाचिन पायनियर्स के नाम से जाना जाता है उन्होंने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। करीब 18,500 फीट की ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी, खराब मौसम और बेहद कठिन रास्ते के बावजूद जवानों ने कैडेट्स को सुरक्षित निकाल लिया।
इस अभियान की खास बात यह रही कि मौके पर कोई तैयार हेलीपैड नहीं था। एनसीसी टीम ने अस्थायी हेलीपैड तैयार किया, जिसके बाद हेलीकॉप्टर ने सटीक लैंडिंग कर चारों कैडेट्स को वहां से निकाला। उन्हें इलाज के लिए लेह स्थित सेना अस्पताल पहुंचाया गया। अधिकारियों के अनुसार चारों की हालत में अब सुधार हो रहा है।
अपराजिता ट्रेक 30 दिनों का करीब 250 किलोमीटर लंबा अभियान है। इसमें तीन महिला अधिकारी और 28 महिला कैडेट्स शामिल हैं। टीम ने हिमाचल प्रदेश से लद्दाख तक का सफर तय करते हुए 18,300 फीट ऊंचे पैरांग ला दर्रे को भी पार किया। यह दर्रा हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी को लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र से जोड़ता
महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स लेह पहुंचे
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इस बीच एनसीसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स 15 सितंबर को लेह पहुंचे। उन्होंने लद्दाख में एनसीसी की गतिविधियों और बुनियादी ढांचे की समीक्षा की। उन्होंने 14 कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल मदनराज पांडे से भी मुलाकात की।
लेफ्टिनेंट जनरल वत्स ने फ्यांग में निर्माणाधीन एनसीसी प्रशिक्षण अकादमी का निरीक्षण कर निर्माण कार्य की प्रगति भी देखी। ‘अपराजिता’ ट्रेक का फ्लैग-इन समारोह 16 सितंबर को त्सो मोरीरी के पास कोरज़ोक में आयोजित किया जाएगा।